खत्म होगा टेलिकॉम सेक्टर का वित्तीय संकट, बदलेगी तस्वीर

manish ranjan

Publish: Sep, 14 2017 10:27:52 (IST)

Industry

हालत सुधारने के लिए टेलिकॉम कमीशन ने इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप से कहा है कि इंडस्ट्री की हालत की समीक्षा करे और  तुरंत राहत देने के उपाय सोचें।

नई दिल्ली। बीते कई महीनों से देश की कई बड़ी टेलिकॉम कंपनियां घाटे से जूझ रही हैं। टेलिकॉम सेक्टर की हालत सुधारने के लिए टेलिकॉम कमीशन ने इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप से कहा है कि वह इंडस्ट्री की हालत की समीक्षा करे और कंपनियों को तुरंत राहत देने के उपाय के बारे में सोचें। टेलिकॉम कमीशन के इस निर्देश से भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया, आइडिया सेल्युलर, रिलायंस कम्युनिकेशंस और टाटा टेलिसर्विसेज जैसी कंपनियों में उम्मीद जगी है। आईएमजी ने कंपनियों को स्पेक्ट्रम की रकम 10 साल के जगह 16 साल में चुकाने की इजाजत देने की सिफारिश की थी। आईएमजी ने कंपनियों पर स्पेक्ट्रम की बकाया रकम पर ब्याज दर कम करने का भी सुझाव दिया था। लेकिन अग्रेसिव प्राइसिंग से इन कंपनियों की हालत खराब करने वाली रिलायंस जियो ने ऐसी किसी राहत का विरोध किया है। आईएमजी को जून में बनाया गया था और इसमें टेलिकॉम विभाग और वित्त मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं। जो इन कंपनियों को राहत देने की बात कर सकते हैं।


5 लाख करोड़ कर्ज

टेलिकॉम सेक्टर का वित्तीय मुश्किल में फंसना सरकार के हित में नहीं है गौरतलब है कि पुरानी टेलिकॉम कंपनियों पर करीब 5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। पिछले साल रिलायंस जियो के सर्विस शुरू करने के बाद इन कंपनियों की आमदनी और मुनाफे में भारी गिरावट का सिलसिला लंबे समय से है।


आईयूसी नियमों पर एकमत नही

इससे पहले टेलिकॉम कंपनियां इंटरकनेक्शन यूजर चार्ज को दोगुना करने की मांग कर चुकी हैं। इन कंपनियों का मानना है कि उनके नेटवर्क पर दूसरे नेटवर्क से आने वाली कॉल्स को पूरा कराने की लागत 30 से 35 पैसे प्रति मिनट लगती है जबकि अभी आईयूसी १४ पैसे प्रति मिनट है।


29 सितंबर को फैसला

आईएमजी ने कंपनियों पर स्पेक्ट्रम की बकाया रकम पर ब्याज दर कम करने के बाद आईएमजी की सिफारिशों पर टीसी 29 सितंबर को फैसला लेगा। इसके बाद जो उसे कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

Web Title "Financial problem for telecom sector end soon"

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