गौरवशाली रियासत कालीन भवनों को देखा, अब वे उनके संरक्षण के लिए प्रयास करेंगे

By: Yggyadutt Parale

Published On:
May, 22 2019 05:57 PM IST

  • गौरवशाली रियासत कालीन भवनों को देखा, अब वे उनके संरक्षण के लिए प्रयास करेंगे

रतलाम रियासत के आखिरी राजा रणबीरसिंह की बेटी लक्ष्मीकुंवर राठौर के पुत्र मार्क बर्जर पहली बार आए

रतलाम। रतलाम रियासत के आखिरी राजा रहे लोकेंद्रसिंह के छोटे भाई रणबीरसिंह की बेटी लक्ष्मीकुंवर राठौर के बेटे मार्क बर्जर जर्मनी से पहली बार रतलाम आए। यहां पर उन्होंने रियासत कालीन आसपास के विभिन्न ठिकानों के राजपूतों से आत्मीयता से मुलाकात की और पुराने रोचक संस्मरण भी सुनाएं। कनेरी की एक शादी में जाने का सौभाग्य मिला, जिसमें यहां की परंपरा को भी देखने का अवसर मिला। पहली बार उन्होंने रतलाम में अपने पूर्वजों की जन्मस्थली और गौरवशाली रियासत कालीन भवनों को देखा और अब वे उनके संरक्षण के लिए प्रयास करेंगे।

मार्क ने बताया कि वे इस बार बहुत कम समय के लिए रतलाम आए हैं, लेकिन सर्दियों में अपने पूरे परिवार और खासकर अपनी नानी मां और मां के साथ रतलाम आने की कोशिश करेंगे। यहां आम लोगों से भी मिलने वाला प्यार, वे कभी भूल नहीं पाएंगे। मालवा में रतलाम रियासत का अपना अलग महत्व है, यहां के महल पुरातात्विक धरोहर है इसे सहेजने बहुत आवश्यक है। भारत में रिश्तो को व परंपराओं को बहुत महत्व दिया जाता है। मुझे यहां आकर नमकीन का वास्तविक टेस्ट पता चला मैंने इसके पहले कभी भी सेव जैसे नमकीन का टेस्ट नहीं किया था।

भारत का ट्रैफिक देखकर डर गए थे मार्क
मार्क ने बताया कि उन्होंने रतलाम में राजवंश के कई भवनों को देखा है। रतलाम के राजमहल के अलावा लक्ष्मीविलास पैलेस पुराना कलेक्टोरेट, के साथ ही सैलाना राज महल, केकट्स गार्डन, कनेरी, शिवगढ़, सरवन आदि की सैर की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में जब वे भारत पहुंचे तो उन्हें ट्रैफिक देखकर बेहद डर लगा, लेकिन अगले कुछ घंटों में वे खुद ही दोस्त के साथ बाईक पर बैठकर घूमने निकल पड़े। मार्क ने बताया कि उनके परिवार, सोशल मीडिया से कुछ खास लोगों से मुलाकात हुई जो रतलाम में उन्हें मिलने भी पहुंचे और बहुत कुछ बताया। यहां आम लोगों से भी मिलने वाला प्यार, वे कभी भूल नहीं पाएंगे।

एतिहासिक धरोहर जिन्हे संरक्षण की आवश्यकता है
आप ने बताया कि रतलाम राजमहल में इटालियन शैली की पेंटिंग्स बनी हुई है जो भारत में कुछ ही स्थानों पर है। मैं लंबे समय से रतलाम और आसपास के रियासतों के बारे में जानकारी पढ़ी और समझ रहे थे, लेकिन पहली बार यहां आने पर पता चला वास्तविक में ऐतिहासिक धरोहर है, गौरवशाली है जिन्हें संरक्षण किया जाना आवश्यक है। आपने सोशल मीडिया से जुड़े कई मित्रों एवं आसपास के राजपूत परिवारों से भी भेंट की। इस चर्चा के दौरान अमलेटा के शैलेंद्र सिंह राठौर व प्रियेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे।

Published On:
May, 22 2019 05:57 PM IST

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