ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस काम से खुश होकर राहुल गांधी ने दे दिया इतना बड़ा इनाम...

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Updated On: Feb, 21 2019 04:37 PM IST

  • दोनों की कार्यक्रमों में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राहुल गांधी ने प्रियंका के बराबर ही तव्वजो दी।

     

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सक्रिय हो गई है। पूरब से लेकर पश्चिम तक इसका असर दिखने लगा है। पूर्वांचल में जहां प्रियंका गांधी मेहनत कर रही हैं वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया जुट गए हैं। प्रियंका कांग्रेस की ताकतवर नेता हैं ही सिंधिया भी अब कांग्रेस में बड़ी हैसियत के साथ राजनीतिक क्षितिज पर उभर रहे हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में प्रियंका के समकक्ष सिंधिया को ला खड़ा करने के पीछे एक सोची समझी रणनीति काम कर रही है। बात चाहे उन दोनों नेताओं के यूपी में लांचिंग के समय की हो या फिर शामली में शहीदों के घर जाने का मामला। दोनों की कार्यक्रमों में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राहुल गांधी ने प्रियंका के बराबर ही तव्वजो दी। लखनऊ में कांग्रेस के रोड शो के दौरान सिंधिया प्रियंका के साथ रथ पर थे तो वहीं तीन दिन की महामैराथन बैठक में भी वे प्रियंका के बराबर ही बैठे।
सिंधिया के ताकतवर बनने की कहानी
उत्तर प्रदेश में अब यह चर्चा जोरों से हो रही है कि यदि किसी कांग्रेसी को राहुल, प्रियंका या फिर सोनिया से मिलना है तो अहमद पटेल नहीं सिंधिया का दरवाजा खटखटाना होगा। अहमद पटेल सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष रहने के दौरान सबसे ताकतवर नेता माने जाते थे। लेकिन अब यह पावर सिंधिया की तरफ शिफ्ट हो गई है। सिंधिया ने इसके लिए जहां पूरी निष्ठा के साथ कांग्रेस की सेवा की है वहीं वह हाईकमान के निर्देशों की पालना में भी सबसे आगे रहे हैं। कहते हैं की कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है और सिंधिया के साथ भी ऐसा ही हुआ। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सिंधिया मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन वहां गांधी परिवार ने कमलनाथ पर भरोसा जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री की कमान सौंप दी गई। इससे सिंधिया उदास हो गए। लेकिन प्रियंका और राहुल के समझाने पर सिंधिया ने एक बार भी मुख्यमंत्री बनने की जिद नहीं ठानी और भोपाल जाने का फैसला छोड़ दिया। इसके बाद सिंधिया, कमलनाथ की ताजपोशी में भी शामिल हुए और अपने समर्थकों को भी शांत कराया और मध्य प्रदेश सरकार बनने के बाद दिल्ली की सियासत में लौट आए।
सीएम पद पर अपनी दावेदारी छोडऩे के बाद सिंधिया को शायद यह उम्मीद नहीं होगी कि उन्हें प्रियंका के बाराबर लाकर खड़ा कर दिया जाएगा। जब अखिलेश और मायावती ने यूपी में महागठबंधन बनाने का एलान कर दिया और कांग्रेस के लिए केवल दो सीटें छोड़ दीं तो राहुल गांधी ने कहा कि उनके पास उत्तर प्रदेश के लिए एक जबरदस्त आइडिया है और यह आइडिया था प्रियंका के साथ ज्योतिरादित्य को यूपी भेजने का। इसके बाद कांग्रेस के नेता भी दंग रह गए। सूत्रों की मानें तो कभी किसी ने नहीं सोचा था कि गांधी परिवार के बराबर लाकर किसी बाहर के नेता को खड़ा किया जाएगा। जिस तरह से प्रियंका गांधी की सियासी एंट्री के समय राहुल गांधी ने अपने हर बयान में ज्योतिरादित्य सिंधिया का जिक्र किया वह एक नई परंपरा की शुरुआत है।

...तो इसलिए पर जताया भरोसा
गांधी परिवार ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर यूं ही नहीं इतना भरोसा जताया है। दिसंबर में आए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद युवा नेता और राजस्थान के वर्तमान उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अशोक गहलोत के आगे जल्द सरेंडर करने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। पायलट मुख्यमंत्री बनना चाहते थे और बार-बार अलग-अलग तरीके से यह बता रहे थे कि राहुल गांधी ने राजस्थान भेजते समय उन्हें राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था, लेकिन वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के लिए गांधी परिवार पर किसी भी तरह का दबाव नहीं डाला। इस दौरान सिंधिया ने जिस तरह से अपने समर्थकों को शांत करवाया वह अंदाज भी गांधी परिवार को पसंद आ गया। इसके बाद ही से सिंधिया गांधी परिवार के गुड बुक में आ गए।

Published On:
Feb, 21 2019 04:37 PM IST

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