विधायक की पत्नी को हुआ डेंगू तो जागा प्रशासन

By: Nitin Bhal

Updated On:
14 Aug 2019, 09:25:57 PM IST

  • Uttarakhand: दून में करीब सैकड़ों लोगों के डेंगू ग्रस्त होने पर भी कुंभकर्णी नींद सोया प्रशासन विधायक की पत्नी के चपेट में आने पर जागा है। बता दें कि राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान...

देहरादून (हर्षित सिंह) . दून में करीब सैकड़ों लोगों के डेंगू ग्रस्त होने पर भी कुंभकर्णी नींद सोया प्रशासन विधायक की पत्नी के चपेट में आने पर जागा है। बता दें कि राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान ( National Institute of Malaria Research ) , नई दिल्ली की एक ब्रांच हरिद्वार में है। आम लोगों पर डेंगू का असर शायद इन्हें दिखा ही नहीं, लेकिन जब उत्तराखंड के बड़े तबके लोग डेंगू की चपेट में आने लगे तो इनकी नींद खुली है। बताया जा रहा है कि जब एक विधायक की पत्नी को डेंगू हो गया तब कई स्थानों से सैंपल लिए गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम को एमएलए हॉस्टल में भी मच्छरों के लार्वा मिले थे।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को सुध आई कि मच्छर पर छिडक़ी जाने वाली कीटनाशक ( Insecticides ) असर ही नहीं कर रही। यह संशय भी बना हुआ है कि मच्छर एडीज एलबोपिक्टस या एडीज एजीपटी है या फिर कोई और। डॉक्टरों का तो यहां तक यह भी मानना है कि मच्छरों पर एक इंसेक्टिसाइड छिडक़े जाने के कारण मच्छरों ने खुद को दवाई के ही अनुकूल बना लिया है।

तीन दिन पहले आई टीम

Dengue fever is spreading in Uttarakhand

एक चिकित्सा अधिकारी के अनुसार राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान की टीम लगभग तीन दिन पहले आई थी। इन्होंने रायपुर के दो-तीन इलाकों से मच्छरों का लार्वा लिया था। इसकी रिपोर्ट एक हफ्ते के अंदर में आएगी। अधिकारी ने बताया कि टीम का काम मूल रूप से मच्छरों पर रिसर्च करना है। रिसर्च कर टीम बताएगी कि क्या एडीज एलबोपिक्टस है कोई और मच्छर है। लार्विसाइडल से डेंगू के मच्छरों पर कमी तो आई है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक इंस्कैटिसाइड से जो असर आना चाहिए वह अभी तक नहीं आया है।

डेंगू के 383 से ज्यादा मामले

Dengue fever is spreading in Uttarakhand

उल्लेखनीय है कि बुधवार तक उत्तराखंड में डेंगू के 383 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें आधे से ज्यादा अधिक मरीज रायपुर इलाके से पाए गए हैं। इसके चलते लार्वा के सैंपल रायपुर से लिए गए हैं। इसमें अब तक देहरादून में 371 मामले सामने आ चुके हैं बाकी 12 अन्य जिलों से हैं। इनमें 257 पुरुष व 126 महिलाएं हैं। चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान की टीम आई थी, टीम यह कंफर्म करना चाह रही थी की मच्छर की ब्रीड कौन सी है। अभी डेंगू मच्छरों पर काबू करने के लिए डेल्टा फॉग व गोकिलाहट पायरेथम ग्रुप की दवाइयां फॉगर के माध्यम से इस्तेमाल की जा रही हैं। यह डब्लयूएचओ के स्टैन्डेर्डस के हिसाब से है। इसके अलावा एंटी लार्वल के लिए टैमफौस ( स्प्रे) पानी में इस्तेमाल किया जाता है। इसे नालियां व जमे पानी में डाला जाता है।

Updated On:
14 Aug 2019, 09:25:57 PM IST

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