मन की तृप्ति का सर्वोत्तम उपाय है व्रत

By: Shankar Sharma

Published On:
Sep, 12 2018 10:31 PM IST

  • यशवंतपुर स्थित मेवाड़ भवन में मुनि रणजीत कुमार, मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में पर्युषण प्रवचन माला के अन्तर्गत मंगलवार को अणुव्रत दिवस कार्यक्रम आयोजित हुआ।

बेंगलूरु. यशवंतपुर स्थित मेवाड़ भवन में मुनि रणजीत कुमार, मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में पर्युषण प्रवचन माला के अन्तर्गत मंगलवार को अणुव्रत दिवस कार्यक्रम आयोजित हुआ।

व्रत चेतना के विकास पर विचार व्यक्त करते हुए मुनि रणजीत कुमार ने कहा कि अणुव्रत चेतना के विकास का उपक्रम है। अणुव्रत के छोटे-छोटे नियमों को अपनाकर व्यक्ति नैतिक बन सकता है। आज चारों ओर मूल्यों का ह्रास हो रहा है। ऐसे वातावरण में नैतिकता के जीवन मूल्यों को अपनाकर स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। जो व्यक्ति चरित्र सम्पन्न होता है, समाज उसे सदैव याद रखता है।


श्रावक के बारह व्रत एवं अणुव्रत आंदोलन की उपयोगिता बताते हुए मुनि रमेश कुमार ने कहा कि व्रतों से चरित्र का निर्माण होता है। स्वयं से जुडऩे की दिव्य प्रेरणा व्रत देता है। मन की तृप्ति का सर्वोत्तम उपाय व्रत है। इससे चरित्र का निर्माण होता है। करणीय और अकरणीय कार्यों का विवेक भी जागृत हो जाता है। वर्तमान में नैतिकता व प्रमाणिकता के विकास की सबसे ज्यादा जरूरत है।

समाज और देश का वास्तविक विकास प्रमाणिकता के आधार पर हो( मुनिद्वय ने नमोकार महामंत्रोच्चारण से कार्यक्रम प्रारंभ किया। हितेश दक ने ‘जपो रे भाई महामंत्र नवकार मंत्र बड़ा ही सुखदाई’ से मंगलाचरण किया। महिला मंडल यशवन्तपुर ने ‘भीतर में आये हम, चेतन को जगाए हम...’ गीत की सामूहिक प्रस्तुति दी। शांतिलाल साांंड ने मुक्तकों से विचार रखे। तेरापंथ सभा यशवंतपुर के मंत्री गौतम मुथा ने संचालन किया।


सबकुछ है, फिर भी दिमाग अपसेट है
बेंगलूरु. तेरापंथ सभा विजयनगर के तत्वावधान में अर्हम भवन में साध्वी मधुस्मिता ने मंगलवार को अणुव्रत दिवस पर कहा कि आदमी के पास टीवी सेट है, आभूषणों का सेट है, किन्तु दिमाग अपसेट है।


उन्होंने कहा कि मनुष्य ने तीव्र गति से उडऩे वाले विमान बना लिए, पर उतना ही मनुष्यता से दूर भागा जा रहा है। कमी नजर आ रही है। ऐसी अवस्था में सम्पूर्ण मानव जाति के उदितोदित भविष्य के लिए अत्यंत संवेदनशील आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया। ऐसा करके उन्होंने धर्म को बंद दरवाजों, खिड़कियों और उजालदानों को खोलने का अद्भुत कार्य किया। धर्म को एक बाड़े में कैद नहीं होने दिया वरन् स्वाधीन पक्षी की तरह पंख फैलाने का मौका दिया। अणुव्रत के जरिए धर्म का चापक दृष्टिकोण दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।


साध्वी ने कहा कि अणुव्रत सार्वजनिक, सार्वकालिक और सार्वभौम कार्यक्रम है। अणुव्रत से केवल धार्मिक ही नहीं, नास्तिक लोग भी आकृष्ट हुए। साध्वी स्वस्थप्रभा ने अणुव्रत की सर्वांगीण व्याख्या करते हुए अणुव्रत की आचार संहिता अपनाने की प्ररेणा दी। तेयुप राजाराजेश्वरी नगर द्वारा संचालित भजन मंडली तुलसी संगीत सुधा ने गीत की प्रस्तुति दी। सुशील चौरडिय़ा ने कार्यक्रम का संचालन किया। हनुमंतनगर सभा अध्यक्ष सुभाष बोहरा, सभा अध्यक्ष बंशीलाल पितलिया के साथ सभी संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे।


बचपन से ही निर्भीक थे वीर महावीर
बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ में आचार्य महेंद्र सागर सूरी ने कहा कि संसार में कई जीव जन्म लेते हैं। कुछ विलक्षण जीव होते हैं जो जन्म से ही अतिशय सहित होते हैं। संपूर्ण जीवन उसी तरह से जीकर संसार से विदा होते अजर व अमर हो जाते हैं। भगवान महावीर के बाल्यकाल के अनेक प्रसंग भी उनकी विलक्षण तेजस्विता को सिद्ध करते हैं। वर्धमान स्वामी के अद्भुत पराक्रम एवं साहस से चाहे परिजन, नगरजन और दुनियाजन कम परिचित रहे हों, पर ज्ञानी एवं देवताओं से यह तथ्य छिपा नहीं था क्योंकि वे बचपन से ही निर्भीक वीर महावीर थे।

Published On:
Sep, 12 2018 10:31 PM IST

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