असम में बाढ़ का प्रकोप: चीन है असल गुनहगार, बांध बनाकर भारत में भेज रहा है तबाही

By: Mohit Saxena

Updated On: Jul, 16 2019 05:15 PM IST

    • Assam Flood: चीन द्वारा छोड़े जा रहे पानी ने असम की स्थिति को और गंभीर बना दिया है
    • बाढ़ की वजह से असम में अब तक करीब 15 हजार लोग बेघर हो चुके हैं

नई दिल्ली। भारत के असम राज्य में एक बार फिर बाढ़ का कहर जारी है। इस बाढ़ के कारण देश को हर साल करोड़ों का नुकसान होता है। असम और उसके आसपास के इलाकों में बाढ़ ने फिर से भीषण तबाही मचा दी है। बताया जा रहा है कि अब तक 15 हजार लोग बेघर हो चुके है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा रहा है। सड़कों के बह जाने से गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क भी टूट गया है।

भारी बारिश के साथ चीन के बांधों से छोड़े जा रहे पानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। चीन यह खेल हर साल दोहराता है। इसकी वजह से भारत ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश को भी भारी नुकसान झेलना पड़ता है।

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असल गुनहगार चीन

चीन से होकर भारत में आने वाली ब्रह्मपुत्र नदी में पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा बांधों के निर्माण की कड़ी निगरानी की है। विदेश मंत्री ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि भारत सरकार ने लगातार चीनी अधिकारियों को अपने विचार और चिंताओं से अवगत कराया है। फ़िलहाल हालात यह हैं कि चीन के बांधों से छोड़े जा रहे पानी ने भारत को मुसीबत में डाल दिया है।

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बांध के पानी को भारत में छोड़ रहा चीन

2014 में चीन ने ब्रह्मापुत्र नदी पर परियोजना के अंतरगर्त झंगमू बांध का निर्माण किया था। इसे 2015 में चालू किया गया। विद्युत परियोजना के तहत यह बांध शुरू किया था। चीन इस पानी को सिंचाई के काम में भी लाता है। मगर हर साल देखा गया है कि चीन बाढ़ के खतरे से बचने लिए अत्याधिक पानी को भारत में भेज देता है।

चीन बांध के एकत्र पानी से बिजली निकालता है और सिंचाई के लिए इस्तेमाल करता है। मगर जब भारी बारिश के कारण पानी का स्तर काफी ऊपर हो जाता है तो चीन सारा पानी भारत में छोड़ देता है। इस कारण यहां पर बाढ़ का विकराल रूप देखने को मिलता है।

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हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने का ढोंग?

गौरतलब है कि भारत से समझौते के तहत चीन हर साल मॉनसून में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी की गुणवत्ता जानकारियां देता हैं। ब्रह्मपुत्र एशिया की बड़ी नदियों में से एक है जो तिब्बत से निकलते हुए भारत में आती है और फिर बांग्लादेश में जाने के बाद वह गंगा में मिल जाती है। इसके बाद यह नदी बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

भारत और बांग्लादेश का चीन के साथ यह समझौता है कि वह अपने यहां से निकल रही नदी के हाइड्रोलॉजिकल डेटा को साझा करेगी। ये आंकड़े मॉनसून के मौसम में 15 मई से 15 अक्टूबर के बीच के होंगे।यह जानकारियां असल में पानी के स्तर को लेकर होती हैं ताकि जिन देशों में यह नदी जा रही है वहां बाढ़ को लेकर सूचित किया जा सके। मगर चीन इन डेटा को कभी भी सही समय पर सांझा नहीं करता है। वह चाहता है कि भारत को इस तरह के नुकसान हो ताकि उसकी आर्थिक स्थिति कभी भी मजूबत न बने। चीन हमेशा से ही भारत को नुकसान पहुंचाता रहा है। सीमाओं में घुसपैठ कर वह कई बार अपनी चालबाजी दिखा चुका है। अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों को आज भी वह अपना मानता है।

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Published On:
Jul, 16 2019 01:23 PM IST

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