फिब्डो ने PM मोदी और सूबे के स्वास्थ्य मंत्री को भेजा पत्र

  • जानिये क्या है फिब्डो और क्या चाहता है पीएम व स्वास्थ्य मंत्री से...
वाराणसी.  साधना फाउंडेशन एवं फेडरेशन ऑफ इंडियन ब्लड डोनर्स आर्गेनाईजेशन (फिब्डो) ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह को रक्तदान के छेत्र में विशेष कार्य योजना के लिए मांग पत्र भेजा है।


साधना फाउंडेशन के संस्थापक सचिव सौरभ मौर्या के अनुसार संस्था पिछले 5 वर्षों से लगातार रक्तदान के क्षेत्र में कार्य कर रही है। वाराणसी से संचालित होकर पूरे देश में जरूरतमंदों को अपनी सहयोगी संस्थाओं को निःशुल्क रक्त मुहैया करा रही है। उन्होंने पत्रिका को बताया कि हमारा यही सिद्धांत है कि किसी की भी जान रक्त की कमी से ना जाने पाए। साथ ही देश का हर युवा रक्तदाता हो।


26, दिसंबर 2016, को उत्तर प्रदेश में फेडरेशन ऑफ इंडियन ब्लड डोनर्स आर्गेनाइजेशन (फिब्डो) का गठन हुआ। इसमे संस्था के संस्थापक सचिव सौरभ मौर्या को फिब्डो उत्तर प्रदेश चैप्टर का प्रदेश सचिव नियुक्त किया गया। इसके उपरांत उत्तर प्रदेश में कई अन्य संस्थाओं ने रक्तदान के क्षेत्र में अपनी सहभागिता दी। आज जब रक्तदान के क्षेत्र में बहुत से युवा जागरूक हो कर अपनी इच्छा से रक्तदान करने आते हैं तो इससे संस्था के कार्यो को और भी बल मिलता है।


फिब्डो यूपी स्टेट चैप्टर के प्रदेश सचिव सौरभ ने बताया कि कुछ ऐसे भी संस्थाएं हैं जो नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (नाको) और स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन कौंसिल, उत्तर प्रदेश (एसबीटीसी, यूपी)  के नियमों को ताक पर रख कर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बीएचयू के सरसुंदर लाल  चिकित्सालय और लखनऊ के एसजीपीजीआई के ब्लड बैंक पर सवाल खड़ा किया है। कहा है कि इन दोनों ही अस्पतालों में बाहर के मरीजों को अस्पताल से ब्लड नहीं दिया जाता और  न बाहर का ब्लड लिया जाता है।

 
यही नहीं, सौरभ ने बताया की नाको और एसबीटीसी के नियमों का उलंघन उत्तर प्रदेश के बहुत से ब्लड बैंक में किया जा रहा है जिसकी शिकायत फिब्डो के लेटर पर एसबीटीसी कार्यालय, लखनऊ से की गई है। उन्होंने बताया कि नेशनल ब्लड डोनेशन पॉलिसी किसी भी ब्लड बैंक में लागू नहीं है। अगर है भी तो फॉलो नहीं किया जाता, अथवा सभी ब्लड बैंको के स्टॉक को भी ऑनलाइन करने की मांग के साथ साथ 18 सूत्रीय मांग उस मांग पत्र में की गई है जिसमे रक्तदाता के हक़ का भी जिक्र है।


बताया कि संस्था ने 186 थैलेसेमिया पीड़ित बच्चों को गोद लिया है। मगर नियमों के ठीक तरह से लागू ना होने और रक्तदान के प्रति जागरूकता ना होने की वजह से बहुत सी समस्याएं आती हैं।