अलीगढ प्रकरण पर योगी के मंत्री का विवादित बयान, भड़की कांग्रेस, बर्खास्तगी की मांग

By: Ajay Chaturvedi

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Published: 08 Jun 2019, 06:38 PM IST

Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. अलीगढ में ढाई साल की बच्ची की नृशंस हत्या पर यूपी सरकार के एक कैबिनेट मंत्री के बयान ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है। खास तौर पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने मंत्री के बयान पर मुख्यमंत्री से उन्हें बर्खास्त करने की मांग कर दी है।

कांग्रेसजनों अलीगढ़ में बच्ची की नृशंस हत्या पर गहरा आक्रोश व दुख व्यक्त किया है। साथ ही बच्ची की नृशंस हत्या को पुलिस प्रशासन व सरकार के लापरवाह रवैये का जीता जागता प्रमाण बताया है। कहा है कि है उक्त घटना सरकार के उन दावों की कलई खोल रहा कि प्रदेश का हर नागरिक सुरक्षित है और अपराधी भयभीत। कहा कि हाल के दिनों में घटित घटनाएं चीख चीखकर इस बात की गवाही दे रही हैं कि प्रदेश में अपराधी भयमुक्त विचरण कर रहे और भाजपा सरकार खुलेआम एैसे तत्वों को मानसिक संरक्षण दे रही। इसका जीता जागता प्रमाण है एक भाजपा सांसद का बलात्कार के आरोपी को जेल जाकर धन्यवाद देना। कहा कि जब इस तरह के नीति नियंता व जनप्रतिनिधि रहेंगे तो हम समाज में सुधार की कल्पना कैसे कर सकते हैं।

वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार के संवेदनहीन मंत्री सूर्य प्रताप शाही के रवैये व उनके द्वारा दिए गये बयान कि, 'इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं' की भर्त्सना करते हुए कहा कि मंत्री का यह बयान बताता है कि वह प्रदेश की कानून व्यवस्था से पूर्णतया संतुष्ट हैं। आम जनता को वह केवल सत्ता पाने की सीढ़ी समझते हैं। शाही जैसे मंत्री को अविलंब बर्खास्त किया जाना जनहित व समाजहित में आवश्यक है जिससे लोग संवेदनशील बन सकें।

वक्ताओं ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि जहां एक ओर नागरिक अपने को असुरक्षित महसूस कर रहा वहीं दूसरी ओर मंत्री का बयान व उनके दल का मानसिक संरक्षण उन्हें असहज बना रहा। आश्चर्य तो यह है कि भाजपा ने न तो अपने मंत्री के बयान की भर्त्सना की ना ही कोई सीख, जो आने वाली पीढ़ी में सत्ता व शासन के प्रति डर पैदा कर रहा।

बैठक में प्रमुख रुप से पूनम कुंडू, प्रमोद श्रीवास्तव ,वीरेंद्र सिंह ,अरूण सोनी ,श्रीष मिश्रा ,सदानंद तिवारी ,राजेश मिश्रा " गुड्डु "रियाज अहमद" बबलू" आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता जिला मीडिया प्रभारी अनिल श्रीवास्तव अन्नू ने की और संचालन डॉ जितेंद्र सेठ ने किया।

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