आओ बच्चों तुम्हें सिखाएं...अपनी प्राचीन भाषा...

By: Lalit Saxena

Published On:
Jun, 03 2017 02:26 PM IST

  • महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में संस्कृत से संस्कार तथा रोजगार के नए अवसरों के उद्देश्य से संस्कृत का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
शैलेष व्यास@उज्जैन. महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से चिंतामन में संचालित  महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में संस्कृत से संस्कार तथा रोजगार के नए अवसरों के उद्देश्य से संस्कृत का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें 12 वर्ष के बालक से लेकर 35-40 वर्ष के युवा संस्कृत लिखना, पढऩा-पढ़ाना और बोलना सीख रहे हैं। सभी की विश्व की प्राचीन भाषा सीखने की अभिलाषा है। शहर से करीब 12 किमी दूर महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में  मालवा प्रांत के 125 विद्यार्थी संस्कृत का ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। इनमें 32 महिला-युवतियां भी शामिल हैं। इन सभी को प्रदेशभर से आए विषय विशेषज्ञ संस्कृत प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

दो समूह में प्रशिक्षण
मंदिर समिति ने संस्कृत भारती के संयुक्त तत्वावधान में इस तरह का यह पहला शिविर लगाया है, जिसमें लोगों को नि:शुल्क संस्कृत सिखाई जा रही है। 4 जून तक संचालित शिविर में 15 जिलों के लोग शामिल हुए हैं।  शिविर को दो समूह में बांटा है। पहला जिनको संस्कृत नहीं आती उन्हें भाषा बोध वर्ग में शुरू से संस्कृत सिखाई जा रही है। दूसरा समूह जिन्हें संस्कृत आती है, उन्हें विशेषज्ञ इसकी शुद्धता एवं व्याकरण का ज्ञान दिया जा रहा है। खास बात यह है कि शिविर में सभी जाति और वर्ग के प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं। 




Special training for Sanskrit at mahakal Vedic Res

 उज्जवल है भविष्य 
संस्कृत का भविष्य उज्जवल है तो इसकी शिक्षा-दीक्षा लेने वालों का आने वाला समय सुनहरा है। देशभर में संस्कृत छात्रों की संख्या बढ़ रही है। विश्व के 35 देशों में संस्कृत शास्त्रों के विषय की खोज हो रही है। कम्प्यूटर वैज्ञानिकों ने भी संस्कृत पढऩा-सीखना शुरू कर दिया है। अंग्रेजी के विश्व स्वीकार्य भाषा बनने के बीच युवा सबसे प्राचीन और समृद्ध भाषा संस्कृत के प्रति दिलचस्पी ले रहे हैं। इसे सीखने के लिए आगे आ रहे हैं। संस्कृत पूजा-पाठ के अलावा ज्योतिष और वैदिक आदि क्षेत्रों से जीविकोपार्जन का माध्यम भी बन रही है। नए-नए शोध भी किए जा रहे हैं। केवल कला ही नहीं, बल्कि विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए भी संस्कृत भाषा एक महत्वपूर्ण भाषा होगी। भारतीय सभ्यता और सैद्धांतिक मूल्यों की गरिमा कायम रखने के लिए युवा पीढ़ी को संस्कृत और संस्कृति से जोडऩे में संस्कृत भारती, महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान और महाकाल मंदिर समिति ने संस्कृत शिविर का आयोजन किया है। 
- पीयूष त्रिपाठी, प्रभारी महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान

रोजगार के अवसर 
संस्कृत से आज रोजगार के तमाम अवसर भी खुल रहे हैं। संस्कृत का ज्ञान लेकर छात्र बीएड, नेट, जेआरएफ आचार्य और पीएचडी जैसी उपाधियां हासिल कर रोजगार के अवसर भी हासिल कर सकता है। युवा स्वास्थ्य, मौसम, वास्तु, तंत्र, संविता, फलित, मुहूर्त और मौसम ज्योतिष में आधुनिक शोघ और अध्ययन कर सकते हैं। इन विषय में रोजगार के अनेक अवसर हैं।
- अरुण द्विवेदी इंदौर, संस्कृत शिक्षक एवं शिविरार्थी

संस्कृत केवल एक भाषा ही नहीं
संस्कृत केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि ऐसी कुंजी है जो विरासत में प्राप्त हुए धर्म संस्कृति व ज्ञान विज्ञान के रहस्यों को खोलने में मददगार है। संस्कृत वैज्ञानिक भाषा है। नासा से मान्यता प्राप्त भाषा संस्कृत को युवा महत्व देने लगे हैं। संस्कृत सेवन्थ जनरेशन के कम्प्यूटर की भाषा होगी। वैज्ञानिक युग में संस्कृत भाषा से संभावित अवसरों ने संस्कृत के प्रति युवाओं में नई लगन, जिज्ञासा और उमंग पैदा कर दी है।  
- लोकेश नरगांव, उमरानी-अलीराजपुर संस्कृत शिक्षक एवं शिविरार्थी

Published On:
Jun, 03 2017 02:26 PM IST