मिलावटी मावे से व्यापारियों ने की तौबा

By: rishi jaiswal

Updated On:
25 Aug 2019, 08:00:00 AM IST

  • मिलावटी मावा से व्यापारियों ने बनाई दूरी, बाजार में बिक रहा रतलामी मावा, १०० रुपए किलो दाम बढ़े व्यापारी

उज्जैन. मिलावटी मावे पर खाद्य विभाग की कार्रवाई का उज्जैन के खुले मावा बाजार में असर देखने को मिला है। आम दिन से लेकर त्योहारी सीजन में १५० से १७० रुपए किलो बिकने वाला खराब गुणवत्ता का मावा मानो बाजार से बाहर हो गया। अब शहर की मावा दुकानों पर रतलामी (शुद्ध घी युक्त) मावा ही बिक रहा है। इसका रेट २४० से २६० रुपए प्रति किलो है। प्रतिष्ठान की साख बचाने व्यापारी खुद खराब व हल्की गुणवत्ता का मावा नहीं बेच रहे, जबकि अब तक अधिकतर दुकानों पर कम घी वाला या वनस्पति घी वाला मावा बिकता था।
शहर में ढाबा रोड मावे का मुख्य खेरची बाजार है। यहां की सभी दुकानों पर अब घी युक्त अच्छी क्वालिटी का मावा ही बिक रहा है। बीते डेढ़ माह से खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद से व्यापारियों ने हल्की गुणवत्ता का मावा बेचना बंद कर दिया। अब जो मावा मिल रहा है वह महंगा जरूर है लेकिन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं। व्यापारियों का कहना है कि हम भी यहीं चाहते हैं कि पूरे बाजार में अच्छी गुणवत्ता का मावा बिके, ताकि ग्राहकों में भाव के अंतर को लेकर संशय ना रहें।
खराब मावे की बाजार में खरीदी बंद
खुले बाजार में व्यापारियों ने खराब व वनस्पति घी या पाउडर मिले मावे की खरीदी ही फिलहाल बंद कर दी। इससे आसपास के गांव व कस्बों में इस तरह की मिलावटखोरी पर भी रोक लगी है। बिकना बंद होने पर मिलावटी मावा उत्पादकों ने कारखाने व उत्पादन बंद कर दिया। यदि खाद्य विभाग की सख्ती बरकरार रहीं तो उज्जैन का मावा बाजार भी रतलाम जैसे शुद्ध मावे के लिए पहचाना जाने लगेगा। मावे के जो जानकार हैं वे रतलाम के मावे को आदर्श मानते हैं। वहां के मावे से बनीं मिठाईयों का कुछ अलग ही स्वाद रहता है।
साख बढ़ेगी तो व्यापार भी, ग्राहक भी संतुष्ट
उज्जैन के मावा बाजार को अब तक थर्ड ग्रेड मावा विक्रय की बहुलता वाला बाजार माना जाता रहा है। यहां के बाजार में रतलाम जैसा शुद्ध मावा नहीं बिकता। घी निकला हुआ या अन्य मिलावटी पदार्थ से तैयार मावा यहां अधिक बिकता है। लेकिन यह पहली बार है जब व्यापारियों ने अच्छी क्वालिटी का मावा बेचना को तवज्जो दी है। लगभग सभी व्यापारी ऊंचे रेट का अच्छा मावा बेच रहे हैं। इससे ग्राहक भी संतुष्ट है क्योंकि उन्हें यह भरोसा है कि अच्छे रेट में खरीदा मावा बेहतर क्वालिटी का है। भले ही कार्रवाई के भय से बाजार में यह बदलाव आया हो, लेकिन मावा बाजार की स्थायी साख की दृष्टि से यह अच्छा है।
एक महीने में १० से ज्यादा नमूने, एक पहली ही रिपोर्ट में मिलावट मिली
खाद्य सुरक्षा एवं ओषधि प्रशासन विभाग करीब एक महीने से मिलावट के विरुद्ध खासा सक्रिय है। इस दौरान विभाग विभिन्न खाद्य सामग्रियों के ५५ से अधिक नमूने लेकर जांच के लिए भोपाल भेज चुका है। इनमें १० से अधिक नमूने मावे के शामिल हैं। हाल में मावे के एक नमूने की रिपोर्ट भी विभाग को प्राप्त हुई है। कुछ सप्ताह पूर्व टीम ने उन्हेल में छापामार कार्रवाई कर एक प्रतिष्ठान से करीब ५५ किलो मावा जब्त कर सेंपल जांच के लिए भेजा था। प्राप्त रिपोर्ट में उक्त मावा वनस्पति घी से बना हुआ पाया गया है। मावे के अन्य सेंपल की रिपोर्ट आना शेष है। इसी तरह विभाग ने अप्रैल २०१८ से जुलाई २०१९ तक मावे के कुल २५ सेंपल लिए थे जिनमें से २० रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। इन रिपोर्ट में ८ सेंपल फेल व १२ पास मिले थे।
कई बार ग्राहक मावे के दाम के मान से खरीदता है। बड़ा अंतर होने से व्यापार पर असर पड़ता है। लेकिन अब पूरे बाजार एक जैसा अच्छी क्वालिटी का मावा ही बिक रहा है। इससे व्यापारी व ग्राहक दोनों चिंता मुक्त है। हम भी चाहते हैं कि रतलामी मावे जैसी साख हमारे मावा बाजार की भी बनें।
सावन खण्डेलवाल, मावा व्यापारी, ढ़ाबा रोड बाजार
हम तो शुरु से ही इस बात के पक्षधर है की शुद्ध क्वालिटी का ही मावा बाजार में बिके। इसके रेट जरुर ऊंचें होंगे लेकिन यह सभी के लिए फायदेमंद है। इस स्थिति से उत्पादक से लेकर ग्राहक में निश्चिंतता रहती है। अच्छे व्यापारी सभी उच्च गुणवत्ता का ही मावा बेच रहे हैं।
सौरभ जैन, दुग्ध उत्पादक व्यापारी, दौलतगंज

Updated On:
25 Aug 2019, 08:00:00 AM IST

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