संस्कृत के साथ एन्वायर्नमेंट व साइंस का नॉलेज 

By: Nagda Desk

Published On:
Jun, 17 2016 08:23 PM IST

  • सीबीसी सिस्टम : विक्रम विवि  में संस्कृत, वेद, ज्योतिर्विज्ञान कोर्स बनाया जॉब ओरिएंटेड, यूथ को लुभाने की कोशिश 
पत्रिका. संस्कृति और संस्कृत, प्रकृति और पर्यावरण, प्राचीन इतिहास जैसे विषयों पर मौजूदा समय में युवाओं की ज्यादा रुचि है। सोशल साइट पर एेसे मुद्दों पर अपनी राय रखने और सामाजिक कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी करने पर भी  आज युवा वर्ग  पीछे नहीं है। युवा संस्कृत, वेद, ज्योतिर्विज्ञान जैसे विषयों का गहन अध्ययन लें और रोजगार भी प्राप्त करें। इसके लिए विक्रम विवि ने अपने नए पाठ्यक्रम में काफी बदलाव किया है। सिलेबस में नए पेपर के साथ ही जैसे विषयों को शामिल किया है। जिनसे विद्यार्थियों को रोजगार मिले और उनकी रुचि भी कोर्स के प्रति बढ़े। विभाग ने च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करने के बाद संस्कृत के साथ पर्यावरण, विज्ञान, आयुर्वेद और अर्थशास्त्र को पढ़ाया जा रहा है।


एेसे चुनेंगे एग्जाम पेपर 
संस्कृत कोर्स में प्रथम सेमेस्टर में विद्यार्थियों को वेद, वेदांग और पालि प्राकृत भाषा विज्ञान तीन विषय होंगे। इसके अलावा विद्यार्थी को प्रथम समूह काव्य, आधुनिक काव्य और धर्मशास्त्र, द्वितीय समूह वैदिक साहित्य का इतिहास, दर्शन शास्त्र का इतिहास तृतीय समूह संस्कृत में पर्यावरण और वास्तुशास्त्र का परिचय विषय में प्रश्नपत्र का चयन करना होगा। द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ सेमेस्टर में प्रश्न-पत्र चुन सकेंगे। संस्कृत के साथ विद्यार्थियों को नाट्यशास्त्र, प्रतिमा विज्ञान, ज्योतिष शास्त्र का इतिहास, आयुर्वेद का इतिहास भी विषय मिलेंगे।


ज्योतिष में भी बेस्ड पेपर 
वर्तमान में ज्योतिष शास्त्र भी यूथ को काफी लुभा रहा है। साथ ही अन्य क्षेत्रों में कार्यरत लोग भी इस विषय में रुचि दिखा रहे हैं। वर्तमान में विक्रम विवि में ज्योतिष कोर्स में भी कई रोचक व स्पेशल विषय है, जो देश के कुछ चुनिंदा विवि में ही पढ़ाए जा रहे हैं। इसमें चिकित्सा ज्योतिष काफी महत्वपूर्ण है। इसी के साथ प्रश्न ज्योतिष, फलित ज्योतिष, नवग्रह ज्योतिष, गुण-लक्षण ज्योतिष आदि शामिल हैं। इसमे भी सीबीसी सिस्टम के तहत तीन अनिवार्य व अन्य विषय का चयन विद्यार्थियों के हाथ में है।  

संकाय में सबसे ज्यादा एडमिशन- कला संकाय में गत सत्र में सबसे ज्यादा एडमिशन संस्कृत, वेद और ज्योतिर्विज्ञान अध्ययनशाला में हुए नए सत्र में भी प्रवेश की जानकारी लेने के लिए काफी विद्यार्थी पहुंच रहे हैं।


किसी भी कोर्स के बाद बड़ी समस्या रोजगार की होती है। इसी समस्या को ध्यान में रखकर रोजगारन्मुखी पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। नए सिलेबस के बाद विद्यार्थियों को अपनी रुचि के विषय पढऩे को मिलेंगे। 
डॉ. राजराजेश्वर शास्त्री मूसलगांवकर, विभागाध्यक्ष 


Published On:
Jun, 17 2016 08:23 PM IST