जन की संख्या को तरसा जनसंख्या अनुसंधान केंद्र

By: Madhulika Singh

Published On:
Jul, 11 2019 01:56 PM IST

  • मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि का जनसंख्या अनुसंधान केंद्र खुद ही ‘जन’ की पर्याप्त ‘संख्या’ को तरस रहा है। दरअसल, केंद्र में स्टाफ का टोटा है जिस कारण से जो इस केंद्र का मुख्य कार्य है अनुसंधान वही अच्छे से नहीं हो पा रहा है। ये हाल पिछले दो साल से है जबकि केंद्र की ओर से इसे बजट की आपूर्ति पूरी हो रही है।

मधुलिका सिंह /उदयपुर. मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि का जनसंख्या अनुसंधान केंद्र खुद ही ‘जन’ की पर्याप्त ‘संख्या’ को तरस रहा है। दरअसल, केंद्र में स्टाफ का टोटा है जिस कारण से जो इस केंद्र का मुख्य कार्य है अनुसंधान वही अच्छे से नहीं हो पा रहा है। ये हाल पिछले दो साल से है जबकि केंद्र की ओर से इसे बजट की आपूर्ति पूरी हो रही है।

सुविवि के जनसंख्या अनुसंधान केंद्र में वर्ष 2017 से नई नियुक्तियां नहीं हुई हैं। वर्तमान में 1 मानद निदेशक, 1 बाबू और 1 चपरासी है और इन्हीं के भरोसे ये केंद्र चल रहा है। जबकि इस केंद्र के लिए 6 अन्य पद प्रस्तावित हैं। इनमें 1 रिसर्च ऑफिसर, 3 रिसर्च असिस्टेंट और 2 रिसर्च फै लो के पद हैं।

38 साल से चल रहा है केंद्र

पूरे देश में 18 जनसंख्या अनुसंधान केंद्र हंै जिनमें राजस्थान में सुखाडिय़ा विवि में ये इकलौता जनसंख्या अनुसंधान केंद्र है। ये केन्द्र वर्ष 1981 से अनुसूचित जनजाति क्षेत्र एवं संपूर्ण राज्य में जनसंख्या से जुड़े हुए अहम मुद्दों पर सर्वेक्षण, सर्वे व शोध कार्य करता रहा है। इसकी प्रगति रिपोर्ट केन्द्रीय एवं राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजी जाती है। जिनके सुझावों पर योजनाएं लागू करने का निर्णय लिया जाता है।

इनका कहना है..

दो साल से स्टाफ नहीं है, बजट भी दे रहे हैं लेकिन पोस्ट नहीं दी है जिससे रिसर्च स्टडी नहीं हो पा रही है। रिसर्च के लिए प्रतिदिन भत्ते पर किसी को रखना होगा ताकि जो रिसर्च स्टडी आने वाली है, वो पूरी हो सके।

डॉ. पूरणमल यादव, मानद निदेशक, जनसंख्या अनुसंधान केंद्र

पहले चार या पांच लोगों का स्टाफ हुआ करता था, लेकिन अब स्टाफ की कमी से जिस तरह से शोध होने चाहिए, वे नहीं हो पा रहे हैं। सर्वे की साइज छोटी कर रखी है जैसे 400 लोगों पर करना है तो हमने 165 लोगों पर ही शोध कार्य किया। एक साल में चार पीएचडी की है और 1 एनुअल रिसर्च वर्क किया है।

चंद्रदेव ओला, रिसर्च इंवेस्टिगेटर

Published On:
Jul, 11 2019 01:56 PM IST

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