रिटायर्ड सूबेदार ने दुरस्थ गांव में छेड़ दी क्रांति

By: pankaj vaishnav

Updated On:
11 Sep 2019, 02:00:27 AM IST

  • अम्बासा में जैविक खेती और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल, रिटायर्ड सूबेदार की प्रेरणा से होने लगी तकनीक खेती

मुकेश पुरोहित. फलासिया . यों तो आदिवासी अंचल में शिक्षा का अभाव होने से कृषि कार्य में तकनीकी का इस्तेमाल नहीं हो पाया है, लेकिन अब तकनीकी की ओर कदम बढऩे लगे हैं। स्थानीय कृषक विद्युत निगम की बिजली के बजाय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने लगे हैं। जैविक खेती की ओर रुझान बनने लगा है। यों कहिए कि महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का सपना साकार होने लगा है। इसका जरिया बना है एक रिटायर्ड सूबेदार।

मूलत: खेरवाड़ा के फुटला गांव के रहने वाले रिटायर्ड सूबेदार मोगालाल पुत्र डायालाल पटेल अम्बासा में आकर बस गए। उन्होंने वर्ष 2002 में रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी जीने के बजाय कृषि भूमि खरीदी। परंपरागत खेती करने के बजाय आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाया। जैविक खेती करने लगे और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से उपज लेने लगे। उनसे प्रेरित होकर क्षेत्र के कई किसान जैविक खेती और सौर ऊर्जा से जुड़ रहे हैं।

बूंद-बूंद सिंचाई की
बड़ी समस्या पानी की कमी व अनियमित विद्युत आपूर्ति की है। मोगालाल ने सरकारी योजना की जानकारी जुटाई। खेत पर सौर ऊर्जा चलित वाटर पम्प लगवाए। बूंद-बूंद सिंचाई की तकनिक अपनाई। अम्बासा के अन्य किसानों को भी प्रेरणा दी। गांव के 20 किसान और तैयार हुए, जो सौर ऊर्जा चलित पम्प का इस्तेमाल करने लगे हैं।

अधिक मुनाफा हुआ

मोगालाल ने आदिवासी क्षेत्र में जैविक खेती से उपज ली, जहां जैविक खेती के बारे में कोई नहीं जानता। उन्होंने बताया कि जैविक खेती से उपज लेने के लिए खेतों के सुधार में 5 वर्ष लग गए। पांच वर्ष बाद अब मोगालाल लाखों रुपए आमदनी कर रहे हैं।

गुजरात में अधिक मांग
अम्बासा गुजरात सीमावर्ती गांव है। गुजरात में जैविक उपज की अधिक मांग है। ऐसे में मोगालाल ने राजस्थान के बजाय गुजरात में उपज बेचना शुरू किया। उन्होंने खेड़ मंडी में उपज पहुंचाई। अब सारे किसान वहीं जाते हैं। अम्बासा से गुजरात की खेड़ मंडी 20 किलोमीटर दूद है। जब की राजस्थान की सबसे करीबी मंडी उदयपुर है, जो अम्बासा से 115 किलोमीटर दूर है।

जैविक खेती से अच्छी उपज होती है। मोगालाल पटेल काफी मेहनती किसान है। उनको देख अन्य किसानों ने भी प्रेरणा ली है। वहीं इनकी मेहनत को देखते हुए मुख्यमंत्री की ओर से सम्मानित किया जा चुका है।
शिवदयाल मीणा, सहायक कृषि अधिकारी, फलासिया

Updated On:
11 Sep 2019, 02:00:27 AM IST

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