शराब का नशा डूबा गया ‘जवानी’

By: bhuvanesh pandya

Updated On:
12 Jun 2019, 09:29:13 AM IST

  • - हजारों युवा धंसे मानसिक रोग के दलदल में

    - प्रतिदिन करीब पांच मामले पहुंचते है मनोरोग विभाग में

भुवनेश पण्ड्या

 

उदयपुर. शराब का नशा जवानी डूबा रहा है। युवाओं की ये ऐसी लत जो उन्हें मानसिक रोग जैसे खतरनाक दलदल में धकेल रही है। मनोरोग बीमारियों की भाषा में इसे एल्कोहल डिपेंडेंस का नाम दिया गया है। महाराणा भूपाल हॉस्पिटल के मनारोग विभाग में गत दो वर्षों में करीब साढ़े तीन हजार मरीज ऐसे आ चुके हैं, जो नशे की बोतल में डूब इस बीमारी की ओर बढ़ चुके हैं। हाल ये है कि इनमें से दो हजार से अधिक मरीज अभी भी नियमित दवाई ले रहे हैं, लेकिन कुछ मरीज ऐसे हैं जो दवा छोड़ फिर शराब के घुंट गटकने लगे हैं।

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आ रहे हैं प्रतिदिन पांच मरीज

मनारोग विभाग में इन दिनों भी लगातार प्रतिदिन पांच मरीज आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि आने वाले मामलों की जांच में सामने आया कि ज्यादातर युवा पहले शराब को दोस्तो व परिवार के माहौल में फंसकर पीने लगता है, बाद में वह धीरे-धीरे इसका आदी हो जाता है। आदतन शराबखोरी के कारण युवा लगातार शराब पीने की मात्रा बढ़ाने लगता है, लेकिन बाद में जैसे ही किसी दिन उसे शराब नहीं मिलती तो सुबह उसका जी मचलने, घबराने, बैचेनी होने की परेशानी सामने आने लगती है। ऐसे में वह सोचता है कि उसे जो आराम मिल रहा है वह शराब से मिल रहा है। इस स्थिति में वह खूब शराब पीने लगता है। जब तक परिवार को पता चलता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

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दवा से कुछ को राहत-कुछ फिर शराब की ओर मुड़े

परिवार वाले जिन मरीजों को यहां लेकर आते हैं, उनमें से ज्यादातर एल्कोहल डिपेंडेंस के मामले हैं। वे इस नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। करीब 60 प्रतिशत मरीजों को दवा से राहत मिल रही है तो अब भी 40 प्रतिशत ऐसे युवा हैं, जो दवा छोडक़र फि र से शराब पीने लगते हैं। इसमें दो प्रकार की दवा मरीज को दी जाती है। इसमें पहले प्रकार की दवा ऐसी होती है जिसे शराब छोडऩे के लिए दिया जाता है, तो दूसरे प्रकार की दवा ऐसी होती है जिससे शरीर में होने वाले परिवर्तन को नियंत्रित किया जा सके।

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प्रतिदिन करीब पांच मरीज शराब पीने के आदतन वाले युवाओं के आ रहे है, ऐसे मरीजों में पागलपन, शक होने, भूलने यानी मेमोरी लोस, तरह-तरह की आवाजें सुनाई देने के लक्षण सामने आए हैं। इसमें कई मरीज डिमेंशिया के भी है। कई मरीज ऐसे होते हैं जो आत्महत्या की ओर भी प्रेरित हो जाते हैं। शराब पीने के आदतन मामलों के पीछे अनुवांशिक कारण, परिवार के माहौल, दोस्ती व अकेलापन है।

डॉ सुशील खेराड़ा, विभागाध्यक्ष मनोरोग विभाग महाराणा भूपाल हॉस्पिटल उदयपुर

Updated On:
12 Jun 2019, 09:29:13 AM IST

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