खेत में घुल गई 18 करोड़ की खाद, अब कृषि विभाग की सैंपल फेल होने की आई रिपोर्ट

By: Nitin Sadaphal

Updated On:
25 Aug 2019, 10:20:00 AM IST

  • बीज और कीटनाशक के भी सैंपल अमानक निकले

टीकमगढ़. निवाड़ी और टीकमगढ़ जिले में अब तक १८ करोड़ रुपए की खाद किसान खरीदकर खेत में डाल चुके हैं। जिसके घुलने के बाद कृषि विभाग की जांच रिपोर्ट में सैंपल फेल होने का खुलासा हुआ है। जिले में घटिया खाद बेचे जाने और इससे किसानों को हुए नुकसान पर विभाग खामोश है। प्रशासनिक अधिकारी भी इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर केवल ब्लैक लिस्टेड किए जाने की दिखावा किया जा रहा है। किसानों के इस नुकसान का जिम्मेदार कौन है, इसकी जांच तक नहीं शुरू हुई।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले में ५ लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में खेती होती है। खरीफ सीजन में अब तक किसान १८ करोड़ की खाद और ३५ करोड़ रुपए का बीज व कीटनाशक खरीद चुके हैं। लेकिन हाल ही में आई जांच रिपोर्ट ने किसानों के होश उड़ा दिए हैं।
कृषि विभाग ने विभिन्न विक्रेताओं के यहां से खाद के १०० सैंपल लिए थे। दो दिन पहले आई जांच रिपोर्ट में कई सैंपल फेल बताए गए हैं। इतने बडे़ पैमाने पर जिले में घटिया खाद की बिक्री चौंकाने वाली है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब हीलाहवाली की जा रही है।
बीज व कीटनाशक भी घटिया- जिले में खाद के साथ बीज व कीटनाशक भी घटिया बेचा जा रहा है। विभाग ने खुद माना कि कुछ हिस्सा अमानक पाया गया है। इससे किसानों को होने वाले नुकसान की चिंता किसी को नहीं है। अफसरों और व्यापारियों की मिलीभगत से यह काला कारोबार चलता है। यही वजह है कि किसानों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।

दुकानदार कमा रहे मुनाफा
किसानों की बर्बादी के बीच व्यापारी मुनाफा कमा रहे हैं। जिले में खाद ९६ सरकारी और १२५ निजी दुकानें द्वारा डीएपी १ लाख २० हजार बोरी १२५० रुपए प्रति बोरी के हिसाब से और यूरिया १ लाख ४० हजार बोरी २५६ रुपए के हिसाब से बेची गई। जिसमें दोनों की विक्रय राशि १८ करोड़ ५८ लाख ४० हजार रुपए किसानों से वसूल किए गए। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव ५ लाख ५३ हजार २५ एकड़ में ६८ लायसेंसी दुकानदारों द्वारा ३५ करोड़ रुपए में बेचा गया है।

यह बोले किसान और व्यापारी
ग्रामीण और ब्लॉक स्तर पर बगैर लायसेंस के अवैध तरीके से कीटनाशक दवाओं की दुकानों का संचालन किया जा रहा है। इन जगहों में विभाग कार्रवाई करने में पीछे हट जाता है। जिसके कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सचिन जैन, कीटनाशक दवा विक्रेता

महंगी कीमत में कीटनाशक दवाएं खरीदकर खरीफ की फसल में छिड़काव किया गया। लेकिन जितना दवाओं का असर करना चाहिए, उतना नहीं हुआ। जिसके कारण भारी नुकसान हुआ है।
दस्सू अहिरवार, किसान कुडीला

उड़द की फसल में डीएपी का उपयोग किया गया। लेकिन कोई असर नहीं पड़ा है। मामले को लेकर क्षेत्रीय कृषि अधिकारी से शिकायत की गई है। लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
लच्छू लोधी, किसान मजरा बछौड़ा

सरकार द्वारा किसानों के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं को संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही उनकी जांच के लिए कर्मचारी और अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। उनके द्वारा योजनाओं में जांच नहीं की जाती है।
हरिकृष्ण परसारिया, किसान

हजारों मेट्रिक टन में डीएपी और यूरिया खाद जिले में दिया जाता है। कुछ हद तक खाद अमानक पाया जाता है। जिसको वापस कर लिया जाता है। अगर किसानों द्वारा उपयोग किया जाता है तो किसानों की शिकायत पर कार्रवाई की जाती है।
रामस्वरूप लाल धु्रव, डीएमओ विपणन साख समिति टीकमगढ़

खाद और कीटनाशक दवाओं के लिए जागरूक किया जा रहा है। अगर किसानों को कीटनाशक दवाएं और खाद अमानक दी गई है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
केपीएस जादौन, सहायक उपसंचालक कृषि

Updated On:
25 Aug 2019, 10:20:00 AM IST

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