यह कैसी देशभक्ति, भारत माता चौक पर 100 फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज लगाने में मनमर्जी

By: Surender Kumar Ojha

Updated On:
13 Aug 2019, 12:20:20 AM IST

  • national flag ठेकेदार के मन में जब आया तब यह ध्वज लगा दिया जाता है।

श्रीगंगानगर। अगले दो दिन बाद पूरा एक साल हो जाएगा जब बीकानेर संभाग (Bikaner division) के एक मात्र एक सौ फीट ऊंचे तिरंगा जिला मुख्यालय पर भारत माता चौक (Bharat Mata Chowk) पर लगा था लेकिन पिछले करीब एक साल में 82 दिन ऐसे है जब बॉर्डर एरिया के इस इलाके में यह तिरंगा लहराया।

बाकी दिन तो नगर विकास न्यास के ठेकेदार की मनमर्जी के आगे अधिकारी नतमतस्तक हो गए। यहां तक कि न्यास प्रशासन ने जिस अधिकारी को राष्ट्रीय ध्वज (national flag) लगाने के लिए नोडल अफसर नियुक्त किया, उसने भी ठेकेदार की तरह रटरटाया जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस से पहले दिन 14 अगस्त 2018 को नगर विकास न्यास प्रशासन ने सुखाडिय़ा सर्किल भारत माता चौक(Bharat Mata Chowk) पर 100 फीट ऊंचा तिरंगा ध्वज लगाया गया था, इस दिन राज्य सरकार के आदेश पर मानव श्रृंखला भी बनाई गई थी। यह इलाके में सबसे ऊंचे तिरंगा ध्वज (

flag) फरहाया तब क्षेत्रवासी देखकर झूम उठे थे लेकिन पिछले एक साल की समय अवधि मेंयह ध्वज तो नगर विकास न्यास और ठेकेदार की मनमर्जी का दंश झल रहा है, ठेकेदार के मन में जब आया तब यह ध्वज लगा दिया जाता है। जब मन आता है तब उतार दिया जाता है। भारत-पाकिस्तान के बीच बॉर्डर पर चल रहे तनाव को देखते हुए इस तिरंगे की अहमियत और भी बढ़ जाती है लेकिन न्यास प्रशासन ने इसकी अनदेखी कर दी। यहां तक कि इलाके के जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी सिर्फ अपनी विज्ञप्ति या फोटो खिंचवाने के लिए भारत माता चौक पर एकत्र होते है लेकिन तिरंगे ध्वज के फहराने या नहीं फहराने के संबंध में प्रतिक्रिया करने से परहेज करते है।
भारत माता चौक पर स्थापित किए गए इस एक सौ फीट ऊंचे तिरंगे को लेकर अड़चन शुरू से बन गई है। जिस दिन स्थापित किया गया, अगले अड़तालीस घंटे उपरांत 16 अगस्त 2018 को जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेपी का निधन हुआ तो राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था। तब इस तिरंगे को आधा झुकाने के लिए जब ठेकेदार गया तो इसमें यह सिस्टम ही नहीं था कि इसे आधा झुकाया जाएं।

ऐसे में काफी मशक्कत के बावजूद यह आधा नहीं झुका तो ध्वज ही उतार लिया गया। यह ध्वज दस दिन बाद फिर से लगाया तो पोल में अड़चन आ गई। इस पोल में लगी मशीन से ध्वज ऊपर नहीं गया तो यह प्रक्रिया एक महीने के लिए बंद कर दिया गया।साढ़े ग्यारह लाख रुपए का बजट खर्च नगर विकास न्यास प्रशासन ने इस 100 फीट ऊंचे तिरंगे ध्वज को स्थापित करने के लिए साढ़े ग्यारह लाख रुपए का बजट खर्च किया है। अगले दो साल तक इसके रखरखाव के लिए ठेका फर्म को अधिकृत किया गया है। दिल्ली से मंगवाए गए इस सिस्टम में बार बार खराबी आती रही है।

इस ध्वज को रात के समय आमजन को दिखाई दे, इसके लिए ध्वज के लिए बनाए गए पोल के आसपास दो और पोल चार चार सौ वॉट की लाइटिंग के लिए स्थापित किए लेकिन आज तक ये लाइटिंग सिस्टम कभी ऑन ही नहीं हो पाए है।
इस बीच राष्ट्रीय ध्वज के संबंध में आचार संहिता भी लागू है। इसमें यह तय किया जाता है कि ध्वज को कब और कौन फहरा और उतार सकता है। उसे ससम्मान उतारने के उपरांत कहां रखना है, यह जानकारी भी तय होती है। लेकिन एक सौ फीट ऊंचे ध्वज के संबंध में यूआईटी ने रजिस्टर भी संधारित नहीं किया है।

सिर्फ नोडल अफसर को नियुक्त किया गया है, उसे भी ध्वज उतारने या लगाने की तिथियों के बारे में जानकारी नहीं है। कब कब नए ध्वज को खरीदकर लगाया गया, पुराने या क्षतिग्रस्त हुए ध्वज को कहां पर और किसके पास है, इसकी भी जानकारी नहीं है।
इस संबंध में न्यास अधिकारियों का एक जैसा जवाब सुनने को मिला, इन अधिकारियों का दावा है कि बरसाती मौसम में ध्वज का कपड़ा गीला होने के कारण भारी हो जाता है। हवा चलने से यह भारी ध्वज गिरने या क्षतिग्रस्त होने की अधिक संभावना रहती है।

ऐसे में इस ध्वज को उतरवाया जाता है। ध्वज को तेज हवा के कारण भी नुकसान होता है। ऐसे में हर तीन माह ध्वज का कपड़ा बदला जाता है। इतने बड़े ध्वज की आपूर्ति कोटा से कराई जाती है। करीब पच्चीससे तीस हजार रुपए का खर्च भी उठना पड रहा है।

Updated On:
13 Aug 2019, 12:20:20 AM IST

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