सोनभद्र का स्थापना दिवस-28 साल से छला जा रहा इस जिले का निवासी

 4 मार्च 1989 को हुआ था  सूबे का गठन

सोनभद्र. सूबे के ऊर्जा हब केे रूप में ख्याति रखने वाले सोनभद्र का आज स्थापना दिवस है। 4 मार्च 1989 को सूबे के तदकालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मिर्जापुर जिले से अलग करके सोनभद्र जिले की आधारशिला रखी और पिपरी को जिले का मुख्यालय बनाते हुए शिलान्यास किया। जिले की आधारशिला के साथ ही यहां के लोगों के साथ छल शुरू ही गया और आज 28 साल बाद भी यहां का अपेक्षित विकास नहीं हो सका। प्रदेश में सर्वाधिक बिजली पैदा करने वाले जिले का अधिकांश हिस्सा आज भी अँधेरे में है लेकिन इस मुद्दे पर न तो कोई जनप्रतिनिधि बोलने को तैयार है और कुछ करने को।

28 साल बाद भी हर सुविधा से वंचित है

सूबे में सर्वाधिक खनिज पदार्थ ,बिजली, वन सम्पदा, उद्योग धन्धे वाले जिले की सीमायें झारखण्ड, मध्यप्रदेश , बिहार और छत्तीसगढ़ से लगती है । चिकित्सा /स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास सभी क्षेत्रों में आज भी काफी पीछे रहने वाला सोनभद्र अपनी हालात पर आंसू बहा रहा है।

सोनभद्र का इतिहास
सूबे में एकमात्र जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज है जो अंग्रेज अधिकारी फ्रेडरिक रोबर्ट के नाम पर पड़ा है।
यह सूबे का एक मात्र ऐसा ज़िला है जो 4 राज्यो से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला है सोनभद्र। ऐसी मान्यता है कि इसका नामकरण यहाँ बहने वाली नदी सोन के नाम पर पड़ा है। ऐसी भी मान्यता है कि प्राचीन राजा पुत्रक ने अपनी रानी पाटली के लिए सोनभद्र का निर्माण किया था जिसका नाम ग्रामपुत्र था। ग्राम संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ गांव है तथा पुत्र सोन को दर्शाता है। 490 क्चष्ट में राजा अजातशत्रु अपनी राजधानी मगध से  राजगढ़ पर्वतीय तथा दुर्गम क्षेत्र मे लाना चाहते थे ताकि शत्रुओ से बचा जा सके। गौतम बुद्ध भी यहां से होकर गुजरे थे। उन्होंने इस क्षेत्र के उज्जवल भविष्य की भविष्यवाणी भी की थी और साथ में आग व बाढ़ से इसकी तबाही की भी भविष्यवाणी की थी।



सोनभद्र विंध्य और कैमूर पर्वत श्रंखला के बीच पड़ता है । इसकी सुंदरता और पर्वतीय पर्यटक स्थल होने के कारण प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने सोनभद्र को स्विट्ज़रलैंड ऑफ़ इंडिया की संज्ञा दी थी जब वह वर्ष 1954 में चुर्क सीमेन्ट फैक्ट्री  का उदघाटन करने आये थे। सोनभद्र को एनर्जी कैपिटल ऑफ़ इंडिया भी कहते हैं क्योंकि यहाँ सबसे ज्यादा पावर प्लांट हैं।
यहाँ कुल मिलाकर लगभग 6 पावर प्लांट हैं जिनसे करीब 9940 रूङ्ख बिजली का उत्पादन होता है जो भारत में किसी भी जिले में सबसे अधिक है। फिर भी सरकार की उदासीनता के कारण यहाँ के कई गाँव बिजली से तक अछूते हैं।जिले में सीमेंट फैक्ट्री डाला भी हैं । सोनभद्र  प्रदेश को राजस्व देने वाला दूसरा सबसे बड़ा ज़िला भी है। फिर भी सोनभद्र भारत के 250 

अतिपिछड़े जिलों में से एक है। सोनभद्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महाभारत युद्ध के समय जरासंध ने कई कैदियों को यही पर कैदी बनाकर भी रखा था। तीसरी शताब्दी में नागवंशी साम्राज्य की राजधानी भी रही थी जो 9वीं शताब्दी तक ध्वस्त हो गयी। देवकी नंदन खत्री का प्रसिद्ध उपन्यास "चंद्रकांता" के विजयगढ, चुनारगढ़ और नौगढ़ भी सोनभद्र के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और यहाँ के साम्राज्य पर आधारित थी। सोनभद्र में ओबरा के पास सोन नदी के पार "अगोरी का किला" भी है जहां माँ काली का प्रसिद्द मंदिर है। अगोरी का किला खरवार और चंदेल साम्राज्य का निवास स्थान था।  यही पर राजा मोल्गत और वीर लोरिक के बीच युद्ध हुआ था जिसमे वीर लोरिक ने राजा मोल्गत को मार दिया था। सोन इको पॉइंट पर इसके मनोरम दृश्य भी हैं। सोन नदी के बीच में हाथी(कर्मामेल) की आकृति का एक बड़ा पत्थर भी है जो राजा मोल्गत से सम्बंधित है। सोनभद्र का विशालतम इतिहास, मंदिर, पर्यटक स्थल, नदियाँ इस पर गर्व करने का मौका देते हैं।
Ashish Shukla
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Web Title: Foundation day of sonbhadra
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