VIDEO माउंट आबू में जलसंकट: भण्डारण की ठोस व्यवस्था नहीं, बारिश में बह जाता हजारों एमसीएफटी पानी

By: Bharat Kumar Prajapat

Updated On:
12 Jun 2019, 11:07:17 AM IST

  • माउंट आबू. बारिश के पानी को रोकने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से हर साल प्यासा ही रह जाता है पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू।

बीके अवतार@ माउंट आबू. बारिश के पानी को रोकने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से हर साल प्यासा ही रह जाता है पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू। ऐसा नहीं है कि यहां जल भण्डारण की बिल्कुल व्यवस्था नहीं है। कुछ जलाशय है जिनमें पानी को सहेजकर रखा जाता है लेकिन ये जलाशय भी जब लबालब हो जाते हैं तो ओवर फ्लो होने वाला पानी छलक कर गुजरात की सीमा में चला जाता है और यहां के लोग हाथ मलते रह जाते हैं। यानी गर्मी में पानी का संकट खड़ा हो जाता है।

सर्वाधिक बारिश 160 इंच
मौसम विभाग की मानें तो पिछले 50 वर्षों की अवधि में इन आठ वर्षों में हुई सर्वाधिक बारिश 1966 में 3978, 73 में 3728, 90 में 3046, 92 में 2859, 94 में 3225, 97 में 2189, 2006 में 2515, 2011 में 2077 , 2017 में 3396 मिमी दर्ज की गई।

संयोग प्रकृति का
इसे प्रकृति का संयोग कहें या प्राकृतिक सामंजस्य का नायाब नमूना। जिसके चलते क्षेत्र में पिछले 50 वर्षों में जहां आठ बार तीन हजार मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई वहीं इतनी ही बार एक हजार से कम एमएम बारिश हो पाई। इसी प्रकार पांच बार अतिवृष्टि व चार बार भीषण अकाल की स्थिति बनी रही।

हजारों एमसीएफटी पानी की बर्बादी
विशेषज्ञों की मानें तो क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद 328 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल के वन्यजीव वनमण्डल से हजारों एमसीएफटी पानी व्यर्थ बहकर चला जाता है। यदि इसका आधा हिस्सा पानी रोक लिया जाए तो पर्यटन स्थल की जलापूर्ति की समस्या का समाधान संभव है। जिससे क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाने को व्यापक स्तर पर हरियाली बनी रहेगी।

योजना मूर्तरूप न लेने का खमियाजा
जानकारों के अुनसार गत चार दशक से भी अधिक समय से स्वीकृति की बाट जो रही सालगांव परियोजना समेत विभिन्न प्रस्तावित स्थानों पर जगह-जगह छोटे-बड़े बंाध, एनिकट बना दिए होते तो समुचित बरसाती पानी का लाभ उठाकर क्षेत्र की खुशहाली व स्मृद्धि में चार चांद लग सकते थे। इन परियोजनाओं के मूर्तरूप न लेने के अभाव में नागरिकों को उसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

सबसे कम बारिश 16 इंच
सबसे कम 1969 में 574, 72 में 394, 80 में 987, 86 में 990, 87 में 564, 99 में 642, 2002 में 428, 2009 में 630, 2018 में 750
मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस प्रकार 1966 में सर्वाधिक 3978.3 मिमी, 1972 में 394.4 मिमी सबसे कम बारिश हुई।

Updated On:
12 Jun 2019, 11:07:17 AM IST

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