सिरोही के सरकारी अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम, एक चिकित्सक के भरोसे मरीज

By: anandi lal

Updated On: Jun, 12 2019 06:12 PM IST

  • सिरोही के अस्पताल में पसरा अव्यवस्थाओं का आलम, मौसमी बीमारियों की भेंट चढ़ा हॉस्पिटल

सिरोही। जिले के प्रमुख व्यापारिक शहर कहे जाने वाले शिवगंज के सबसे बड़े अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम पसरा है। अस्पताल में कहने को तो आठ चिकित्सकों को नियुक्त किया हुआ है। लेकिन हकीकत में एक या दो चिकित्सक ही कार्य पर हैं बाकी किसी न किसी कार्य से लम्बे अवकाश पर चल रहे हैं। गर्मी के दिनों में एक तरफ मौसमी बीमारियों का प्रकोप रहता है, ऐसे समय में इतने चिकित्सकों को लंबा अवकाश कैसे दे दिया गया यह भी बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। चिकित्सकों की कमी की वजह से उपचार करवाने आने वाले मरीजों की भीड़ के बावजूद अस्पताल के वार्ड खाली पड़े हैं।

चिकित्सक गए छूट्टी पर तो इलाज करे कौन..

स्त्री रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता के बावजूद प्रसूताओं को मजबूरन दूसरे अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ रहा है। दरअसल, राजकीय सामुदायिक अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर मरीजों की शिकायतों के चलते मंगलवार को पत्रिका टीम ने पड़ताल की तो कई हैरान करने वाली बातें सामने आई। सुबह करीब दस बजे का वक्त, अस्पताल में सामान्य चिकित्सा विभाग में डॉ. शैतान कुमार कार्य करते मिले। उनके चैम्बर के सामने मरीजों की कतारें लगी हुई थी। आयुष चिकित्सक डॉ शकील मोहम्मद उनकी मदद कर रहे थे। दंत रोग विभाग में तैनात चिकित्सक अपना रोजमर्रा का कार्य निबटा रहे थे। इसके अलावा अन्य चिकित्सकों के चैम्बर खाली पड़े दिखे। एक अन्य चिकित्सक डॉ संयोगिता राठौड़ ड्यूटी पर तो थी लेकिन वे किसी को बताए बिना ही अपने व्यक्तिगत कार्य निबटाने के लिए अस्पताल से बाहर गई हुई थी। करीब आधे घंटे तक पत्रिका टीम अस्पताल में रही। तब तक नि:श्चेतना विशेषज्ञ वापस नहीं लौटी थी।

 

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कार्यवाहक प्रभारी डॉ शैतान कुमार ने अस्पताल में करीब दो सौ का ओपीडी बताया गया। अस्पताल में तैनात चिकित्सकों के अवकाश के बारे में कहा कि स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ मनीषा कच्छवाह पिछले काफी दिनों से अवकाश पर हैं और वे वापस ड्यूटी पर कब लौटेंगी इसका पता नहीं है। इसी प्रकार डॉ वीणा सोलंकी एक साल से अवकाश पर चल रही है उनके भी अस्पताल आने के बारे में कोई निश्चित तिथि नहीं है। अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ गोपालसिंह 3 जून से अवकाश पर है। वे 13 जून को फिर से ड्यूटी पर आएंगे। इसी प्रकार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ माणकचंद जैन 15 दिन की पीएल पर है। एक अन्य चिकित्सक डॉ पुष्पा मीना भी चार दिन के अवकाश पर गई हुई है।

एक चिकित्सक के भरोसे व्यवस्था

अस्पताल की बिगड़ी व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौसमी बीमारियों के प्रकोप के बावजूद सामान्य चिकित्सा मात्र एक चिकित्सक के भरोसे टिकी हुई है। किसी सरकारी कार्य अथवा कोर्ट पेशी होने पर उनके वहां चले जाने पर वह व्यवस्था भी ठप हो जाती है। उसके बाद अस्पताल में एक मात्र आयुष चिकित्सक ही रह जाते हैं जो केवल आयुर्वेद एवं युनानी चिकित्सा उपचार ही दे सकते हैं। खाली पड़े हैं वार्ड अस्पताल में अव्यवस्था का आलम इस कदर है कि सरकारी आदेश पर गर्मी के दिनों में लू संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक होने को देखते हुए लू, ताप घात वार्ड तो बना दिया गया है लेकिन चिकित्सकों के अभाव में लू ताप घात वार्ड में मरीजों का टोटा है। इतना ही नहीं प्रसुता वार्ड जहां उपखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों से प्रसूताओं को प्रसव के लिए लाया जाता था वार्ड में बामुश्किल कोई बेड खाली मिलता था। वहां चिकित्सक के अभाव में आज सारे पलंग खाली पड़े हैं।

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Published On:
Jun, 12 2019 06:08 PM IST

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