इसलिए चढ़ी नेताओं की सांसें, जाने इस खबर में

By: Vinod Singh Chouhan

Updated On: Jun, 12 2019 06:41 PM IST

  • शहर में नए वार्ड बनने से लगभग 14 से 26 वार्डो की सीमाएं ज्यादा प्रभावित होंगी।

सीकर.

शहरी सरकार के अगले बोर्ड में 15 नए माननीय बाहरी कॉलोनियों से निकलेंगे। शहर की बाहरी कॉलोनियों में नए वार्ड ज्यादा बनने की सबसे ज्यादा संभावना है। शहर में नए परिसीमन के बाद वार्डो की औसत आबादी 3800 से चार हजार तक होगी। शहर में नए वार्ड बनने से लगभग 14 से 26 वार्डो की सीमाएं ज्यादा प्रभावित होंगी। नए वार्ड बनने से बाहरी वार्डो का क्षेत्रफल भी कम होगा। स्वायत्त शासन विभाग के आदेश के बाद राजस्थान पत्रिका टीम ने वार्डो की क्षेत्रफल व आबादी के अनुपात को देखा तो कई तथ्य सामने आए हैं। एक्सपर्ट के अनुसार शहर के वार्ड संख्या 1 से 5, 24, 27, 33, 34, 42, 43, 44 व 45 की सीमाओं में सबसे ज्यादा फेरबदल होने की संभावना है। नए समीकरण से फायदे और नुकसान के गणित को लेकर पत्रिका की खास रिपोर्ट।
पार्षदों की संख्या बढऩे से यह फायदा
शहर में नए वार्ड बढऩे से पार्षदों की संख्या भी बढ़ेगा। इसका सीधा फायदा जनता को मिलेगा। वर्तमान में कई वार्डो का क्षेत्र काफी लंबा है। इस कारण वार्ड पार्षद भी हर इलाके की समस्या नहीं सुन पाते हैं। अब वार्ड और भी छोटे होने से आमजन की शिकायत सीधे पार्षद तक पहुंच सकेगी।

राजनीतिक दलों का बढ़ेगा कुनबा
नए परिसीमन के साथ सियासी समीकरण भी बदल जाएंगे। फिलहाल नगर परिषद बोर्ड पर कांगे्रस का कब्जा है और भाजपा विपक्ष में है। एक बार सीधे सभापति के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को गढ़ में मात दी थी। नए समीकरणों के बाद भाजपा, कांगे्रस व माकपा के पार्षदों की संख्या भी बढ़ेगी। वहीं निर्दलीय पार्षदों कुनबा भी बढ़ेगा।
जनता की सीधी भागीदारी बढ़ेगी: सभापति
सभापति जीवण खां का कहना है कि सरकार के इस फैसले से जनता की भागीदारी बढ़ेगी। पार्षदों तक जनता की पहुंच आसान होगी। शहर को बजट ज्यादा मिलने से विकास भी तय समय पर पूरे होंगे। नए परिसीमन का सबसे ज्यादा फायदा बाहरी कॉलोनियों के लोगों को मिलना तय है।
निष्पक्ष तरीके से हो परिसीमन: नेता प्रतिपक्ष
नगर परिषद के नेता प्रतिपक्ष अशोक चौधरी का कहना है कि शहर में आबादी के हिसाब से नए वार्ड तो बढऩे ही चाहिए। लेकिन कांग्रेस को अब परिसीमन में दखल बिल्कुल नहीं देना चाहिए। परिसीमन जितने अच्छे तरीके से शहरवासियों को सुविधाएं भी उतनी आसानी से मिल सकेगी।
स्थानीय विधायकों की बढ़ेगी चुनौती
सीकर जिले के सभी नगरीय क्षेत्रों में पार्षदों की संख्या बढऩे से स्थानीय विधायकों की चुनौती काफी बढ़ेगी। क्योंकि स्थानीय विधायक को नगर निकाय और विधानसभा चुनाव में काफी समीकरण बदलने होंगे। वहीं पार्षदों की संख्या बढऩे पर मजबूत सत्ता पक्ष व विपक्ष मिलेगा, ऐसे में तालमेल बिठाने का काम काफी चुनौतीभरा है।

Published On:
Jun, 12 2019 05:35 PM IST

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