शर्मनाक...! सीकर में हर साल 720 लोग लगा रहे है मौत को गले

By: Bhagwan Sahai Yadav

Updated On:
10 Sep 2019, 06:11:05 PM IST

  • यह केवल एक उदाहरण मात्र नहीं सच्चाई है। जिले में हर वर्ष औसतन ७२० लोग किसी न किसी कारण से आत्महत्या कर रहे हैं। एज्युकेशन हब के रूप में प्रदेश में पहचान बनाने वाले सीकर जिले के लिए यह शर्मनाक हकीकत है।

सीकर. यह केवल एक उदाहरण मात्र नहीं सच्चाई है। जिले में हर वर्ष औसतन ७२० लोग किसी न किसी कारण से आत्महत्या कर रहे हैं। एज्युकेशन हब के रूप में प्रदेश में पहचान बनाने वाले सीकर जिले के लिए यह शर्मनाक हकीकत है।
हर रोज एसके अस्पताल के ट्रोमा में औसतन दो मरीज रोजाना एेसे आते हैं जिन्होंने जहर, फांसी पर लटकने, हाथ की नसों को काट लिया हो। युवा प्रतिस्पर्धा के युग में अच्छी नौकरी, पैसा, प्यार में नाकामी और कर्ज नहीं चुका पाने पर अवसाद में चले जाते हैं और इसी तनाव के कारण कई लोग आत्महत्या का रास्ता अपना लेते हैं।
अच्छी बात यह है कि इनमें से ६५ प्रतिशत से ज्यादा लोगों को बचा लिया जाता है। हालांकि कानून की नजर में आत्महत्या का प्रयास करना व उसके लिए दुष्प्रेरित करना अपराध है। वल्र्ड एंटी सुसाइड दिवस पर मनोविज्ञानिकों का कहना है कि व्यक्ति समस्याओं का समाधान नहीं होने की स्थिति में आत्महत्या का रास्ता अपनाता है। उसे समय पर परामर्श दिया जाए तो इन आंकड़ों को कम किया जा सकता है।


पुरुषों की संख्या महिलाओं से दोगुनी


जिला अस्पताल से लिए गए पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो आत्महत्या करने के मामले में पुरुषों की संख्या महिलाओं से दोगुनी है। एक जनवरी से जुलाई २०१९ तक २५६ महिलाओं व ४६५ पुरुषों ने आत्महत्या की। जबकि वर्ष 2018 में १३९ महिलाओं ने व ५२५ पुरुषों ने तथा वर्ष 2017 जुलाई तक २८९ महिलाओं ने तथा ४४७ पुरुष ने आत्महत्या की।


युवा इसलिए मौत को लगाते हैं गले


युवाओं के तनाव में आने का एक कारण कर्जदार होना है। नशा करने, जुआ खेलने व ब्रांडेड कपड़े-जूते व दुपहिया व चौपहिया वाहन रखने के शौक के चलते युवा कर्ज लेते हैं। इसके अलावा प्रेमप्रसंग में नाकामी, पढाई का तनाव, गरीबी और बेरोजगारी, पारिवारिक क्लेश, मानसिक बीमारी और कर्ज चुकाने में असफल होना। कई युवा तो पांच से दस रुपए प्रति सैकड़ा के हिसाब से बाहुबलियों से कर्ज ले रहे हैं। इसे समय पर नहीं चुकाने एवं बार-बार कर्ज चुकाने की धमकियां मिलने के चलते कई युवा आत्महत्या कर लेते हैं।


केस एक:

सालासर सीएचसी से रैफर २४ वर्षीय महिला सुनीता (बदला हुआ नाम) एसके अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में सोमवार सुबह बेहोश हालात में पहुंची, उसके मुंह से इतना ही निकला कि परिवार के लोगों के तानों से परेशान होकर जीवन खत्म करने के लिए कीटनाशक पी लिया लेकिन अब पछता रही है। फिलहाल महिला एसके अस्पताल के फीमेल मेडिकल वार्ड में गंभीर हालत में भर्ती है।

Updated On:
10 Sep 2019, 06:11:05 PM IST

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