करगिल युद्ध हीरो के नेतृत्व में इस गांव ने राजस्थान सरकार से जीती बड़ी ‘जंग’

By: Vishwanath Saini

Published On:
Sep, 12 2018 12:05 PM IST

  • Dayal Ki Nangal Village in Neem Ka Thana (Sikar) Rajasthan

मावण्डा (सीकर). किसी भी जंग को जीतने में फौजी की जिद्द और जुनून खासे मायने रखती है। इस बात का जीता जागता उदाहरण हैं महावीर चक्र विजेता दीगेन्द्र सिंह। करगिल युद्ध 1999 के हीरो रहे दीगेन्द्र सिंह के नेतृत्व में राजस्थान के सीकर जिले के गांव दयाल की नांगल ने सरकार से बड़ी जंग जीत ली है।

 

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जंग...गांव को नई पंचायत समिति पाटन से हटाकर पुरानी पंचायत नीमकाथाना में ही वापस जुड़वाने की थी। तीन साल के लम्बे संघर्ष व नौ बार चुनावों को बहिष्कार करने के बाद राजस्थान सरकार ने दयाल की नांगल गांव को वापस नीमकाथाना में जोडऩे का आदेश जारी किया है।

 

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मंगलवार को जैसे ही यह आदेश जारी हुआ तो दयाल की नांगल गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। रिटायर फौजी के नेतृत्व में सरकार को झुका देने की खुशी में ग्रामीणों ने आतिशबाजी की और मिठाई बांटकर जश्र मनाया। इस दौरान ग्रामीणों ने डीजे के साथ नाचते गाते पूरे गांव में जुलूस भी निकाला।

 

 

 

यह है पूरा घटनाक्रम

 

-राजस्थान सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन के दौरान ने गांव दयाल की नांगल को नीमकाथाना से हटाकर नवगठित पंचायत समिति पाटन के अधीन कर दिया।
-पाटन गांव दयाल की नांगल से दूर है और ग्रामीण नीमकाथाना पंचायत समिति के अधीन ही रहना चाह रहे थे।
-सरकार ने ग्रामीणों ने यह मांग नहीं तो उन्होंने संघर्ष समिति गठित कर चुनाव बहिष्कार को हथियार बनाया।
-वर्ष 2015 में हुए पंचायती राज के चुनाव में गांव दयाल की नांगल में किसी भी ग्रामीण ने वोट नहीं डाला।
- प्रशासन को चेतावनी दी कि जब तक उनके गांव को पहले कि भांति नीमकाथाना पंचायत समिति में नहीं मिलाया जाएगा वे किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेंगे।
-प्रशासन समय-समय गांव की दयाल की नांगल में चुनाव करवाने का प्रयास किया, मगर बार यहां से मतदान दल को बैरंग लौटना पड़ा।
-वर्ष 2015 से लेकर 2018 तक गांव दयाल की नांगल के लोगों सरपंच के चुनाव का नौ बार किया।
-हर बार प्रशासन ग्रामीणों की एकता के आगे यहां चुनाव नहीं हो सके। आखिरकर ग्रामीणों की एक जुटता के सामने सरकार को झुकना पड़ा।
-10 सितम्बर 2018 को सरकार ने एक आदेश जारी कर दयाल की नागल को पाटन से पृथक कर नीमकाथाना पंचायत समिति में वापिस सम्मिलित करने कि घोषणा की।

 

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Digendra singh

बनाई संघर्ष समिति

इस बारे में ग्रामीणों ने करगिल योद्धा महावीर चक्र दिगेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में ग्राम स्तर पर संघर्ष समिति बनाई, जो लगातार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपने गांव को वापस नीमकाथाना पचायत समिति में मिलाने की मांग उठाती रही। इस बारे में दिगेन्द्र कुमार ने बताया कि गत दिनों वे मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे से मिलकर उनके गांव को वापस नीमकाथाना पंचायत समिति में मिलाने कि बात कही थी।

इस कारण नहीं जाना चाहते पाटन में

ग्रामीणों ने बताया कि नीमकाथाना के लिए आने जाने के लिए साधनों के साथ भौगोलिक दृष्टि से नीमकाथाना उनके लिए बिल्कुल सही है। जबकि पाटन उनको सही नहीं बैठता सरकार ने जबरदस्ती गांव को पाटन में शामिल करने की कोशिश की। कुल ग्रामीणों का ये भी कहना था कि राज्य सरकार ने विधानसभा के चुनाव नजदीक आने से यह सब किया है।

Published On:
Sep, 12 2018 12:05 PM IST