बदहाली का शिकार विराट व्यायाम शाला, तीन साल से बंद पड़ा अखाड़ा,1962 में हुआ था निर्माण

By: Amaresh Singh

Updated On:
25 Aug 2019, 07:41:02 PM IST

  • प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी

शहडोल। नगर की इकलौती व्यायाम शाला प्रशासनिक अनदेखी और जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण बदहाल हो गई है। जबकि इस व्यायाम शाला के अखाड़े में अब तक लगभग 50 से अधिक पहलवानों ने अपने जौहर और प्रतिभा का प्रदर्शन कर पहलवानी की विधा और दांव पेंच सीखे हैं। लेकिन वर्तमान समय में मेंटीनेंस के अभाव के कारण व्यायाम शाला बदहाली का देश झेल रही है। हालात ऐसे है कि व्यायाम शाला में बनाया गया पहलवानों के लिए कुश्ती के लिए अखाड़ा क्षतिग्रस्त होने के कारण तीन सालों से अखाड़ा बंद है। वहीं नागपंचमी पर आयोजित होने वाला एतिहासिक दंगल अखाड़े के अभाव के कारण कभी रघुराज हायरसेकंडरी स्कूल मैदान तो कभी गांधी स्टेडियम का उपयोग अस्थाई अखाड़ा तैयार कर आयोजन किया जाता है। मसलन इस मामले को लेकर नपा से लेकर खेल कूद विभाग के साथ ही आदिमजाति कल्याण विभाग द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जबकि हर साल खेल गतिविधियों को बढ़ाने के लिए इन विभागों में भारी भरकमराशि शासन द्वारा आवंटित की जाती है, लेकिन किसी विभाग और अधिकारी ने इसकी दशा सुधारने की जहमत नहीं उठाई।

1962 में तत्कालीन कलेक्टर ने बनावाया था व्यायाम शाला
नगर के विराटेश्वरी मंदिर के सामने विराट व्यायाम शाला का निर्माण 1962 में तत्कालीन कलेक्टर एलके मलहोत्रा ने कराया था और प्रशासन द्वारा इसके निर्माण के लिए राशि जारी की गई थी, इसके बाद से किसी अधिकारी और विभाग तथा जन प्रतिनिधियों ने ब्यायाम शाला के मेंटीनेंस और रख रखाव तथा होने वाले आयोजनों के लिए एक कौड़ी नहीं दी, जबकि इसके लिए व्यवस्थापक मण्डलों ने विधायकों और सांसद सहित नपा अध्यक्ष तक से ब्यायाम शाला के लिए अखाड़े और उसके रखरखाव के लिए मांग की, लेकिन हर किसी ने इस मामले में अनदेखी की।


विलुप्त हो रही कला
संशासन के अभाव के कारण अब जिले से धीरे-धीरे पहलवानी की कला विलुप्त होने की कगार पर है, जबकि इस ब्यायाम शाला में देश के कोने कोने से पहलवान आकर नागपंचमी में होने वाले दंगल में प्रदर्शन कर चुके हैं। वहीं लगभग 50 से अधिक नामी गिरामी पहलवानों ने पहलवानी की कला सीखी है, लेकिन अब यह कला विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच गई है।


नहीं मिली कहीं से मदद
इस संबंध में व्यायाम शाला व्यवस्थापक मूूूूूूूलचन्द्र बाधवानी ब्यायाम शाला का अखाड़ा तीन साल से क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद है, जिससे यहां आने वाले पहलवानी का दांव पेंच सीखने वालों को सुविधा नहीं मिल रही है। इसके रखरखाव और मरम्मत के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से कई बार मांग की लेकिन मदद नहीं मिली। संसाधन के अभाव के कारण पहलवानी की कला विलुप्त हो रही है।

Updated On:
25 Aug 2019, 07:41:02 PM IST

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