सागर. आला रे आला तेरी मटकी संभाल ब्रज बाला..., नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैयालाल की हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की..., मैया मोहे मैं नहीं माखन खायो...Ó के भजनों पर मंदिरों में श्रध्दालु झूम उठे। शनिवार को जैसी ही घडी़ की सुई रात १२ बजे पर पहुंची, लोगों का उत्साह दोगुना हो गया है। शहर के मंदिरों में उदया तिथी में भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया और मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।

गुलाब बाबा मंदिर में शनिवार को मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मटकी फ ोडऩे के इस रोमांच प्रयास को देखकर लोग उत्साह से साथ श्रीकृष्ण के जयकारे लगा रहे थे। सभी टोलियों द्वारा बारी-बारी से निर्धारित समय सीमा में मटकी फोडऩे का भरपूर प्रयास किया गया था। मटकी के फोड़ते ही लोग झूम उठे और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाने लगे।

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