कर्मयोग, भक्तियोग एवं ज्ञानयोग समग्र व्यक्तित्व के लिए आवश्यक: प्रो. गिरि

By: Satish Likhariya

Updated On: 24 Aug 2019, 12:59:26 PM IST

  • विवि में मनाया कृष्ण जन्मोत्सव

सागर. डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि के योग शिक्षा विभाग में कृष्णजन्मोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिंदी एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो.आनंद प्रकाश त्रिपाठी व मुख्यवक्ता जयपुर के महेन्द्र कुमार शर्मा ने दीप प्रज्जवलन किया। योग विभागाध्यक्ष प्रो. गणेश शंकर गिरि ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य योगेश्वर कृष्णजन्मोत्सव के अवसर पर कृष्ण के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालना है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति को समग्र स्वास्थ्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त कर सुखमय जीवन के प्रति जागरुक हो सके। मनुष्य स्थल शरीर मात्र ही नही है, यह जीवन देह प्राण मन व आत्मा का संयोग है। आज के मनोकायिक समस्याओं का समाधान भी हमें समग्रता में ढुढऩा पड़ेगा। श्री मद्भागवद गीता में वर्णित कर्मयोग, भक्तियोग एवं ज्ञानयोग ही हमें समग्र बनाता है। प्रो. त्रिपाठी ने योग की महत्वता बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के दैनिक जीवन में श्री मद्भागवत गीता के उपदेशों एवं कृष्ण के चरित्र को आत्मसात करना चाहिए। अपने जीवन लक्ष्य व कर्तव्य को कभी नही भूलना चाहिए, जिससे हम अपने आंतरिक द्वंदों से सामना कुशल पूर्वक कर सकें। महेंद्र ने कृष्णजन्मोत्सव संबंधित चर्चा करते हुए बताया कि आज पूरा विश्व शांति चाहता है। उसके लिए पाश्चात्य देशों ने सुख को भोग में खोजा और भारतीय मनीषियों ने उस सुख को अध्यात्म एवं आत्मा में खोजा। वस्तुत: आन्नद आत्मा का ही धर्म है इसे प्राप्त कर ही विश्वशांति प्राप्त हो सकती है। इस अवसर पर योग प्रशिक्षक अंकित शर्मा के निर्देशन में विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा कृष्णजन्मोत्सव पर आधारित भजन, कर्मयोग पर आधारित लघुनाटिका, राधाकृष्ण नृत्य एवं योगाभ्यास का प्रदर्शन किया।

Updated On:
24 Aug 2019, 12:59:25 PM IST

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