यहां सरकार से नाराज हैं वकील, खोला मोर्चा

By: Mrigendra Singh

Published On:
Aug, 29 2017 12:06 PM IST

  • जिला अधिवक्ता संघ के आह्वान पर न्यायालयीन कार्य से अलग रहे वकील
     इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में कोर्ट भवन बनाने की मिली है अनुमति

रीवा। जिला एवं सत्र न्यायालय के भवन के स्थल चयन को लेकर एक बार फिर वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया है। जिला अधिवक्ता संघ के आह्वान पर न्यायालयीन कार्य का वकीलों ने बहिष्कार शुरू कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन अनिश्चतकालीन है।

प्रशासनिक हठधर्मिता से अटका काम
कोर्ट परिसर के बाहर वकीलों की एक सभा भी आयोजित की गई, सभा को संबोधित करते हुए अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि कोर्ट का भवन निर्माण हर बार प्रशासन की हठधर्मिता के चलते अटक रहा है। शहर में एसपी निवास, कुलपति निवास, पुलिस मोटर वर्कशाप, नरेन्द्र नगर की आवासीय कॉलोनी, खन्ना चौराहे की शासकीय आवासीय कॉलोनी, गवर्नमेंट प्रेस आदि की भूमि खाली कराई जा सकती है तो जिला कोर्ट भवन के लिए कौन सी समस्या आ रही है।

आश्वासन देकर भूल जाती है सरकार
अधिवक्ता संघ अध्यक्ष ने कहा कि कोठी कंपाउंड परिसर में ही कोर्ट भवन बनाने के लिए पर्याप्त स्थान है। इसके बावजूद प्रशासन अपने मन की कर रहा है। पाण्डेय ने कहा कि हर बार आंदोलन के समय आश्वासन दिया जाता है कि वकीलों की मंशा के अनुसार ही निर्माण होगा। बाद में कार्रवाई कुछ और हो जाती है, जिससे वकीलों को हड़ताल पर उतरना पड़ता है।

नए प्रस्ताव की दी जानकारी
जिला अधिवक्ता संघ की ओर से कोठी परिसर में ही कोर्ट भवन बनाने के लिए कुछ सरकारी विभागों के कार्यालयों को अधिग्रहित करने का प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी दी गई। संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि जलसंसाधन विभाग का गंगा कछार कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग का कार्यालय, जिला अभियोजन कार्यालय, न्यायिक सेवा सदन और न्यायालय की पुरानी बिल्डिंग आदि के हिस्से में नए कोर्ट भवन का प्रस्ताव दिया गया है।

इंजीनियरिंग कॉलेज की भूमि आवंटति नहीं हो
इंजीनियरिंग कॉलेज की भूमि पर जिला कोर्ट भवन बनाए जाने को लेकर शुरू हुई चर्चा के बीच फिर शिकायत दर्ज कराई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा बीते साल कलेक्टर को लिखे गए उस पत्र का हवाला देते हुए संभागायुक्त से शिकायत दर्ज कराई है जिसमें कहा गया था कि इंजीनियरिंग कॉलेज की भूमि में गैर शिक्षकीय कार्य के लिए किसी भी संस्था या निकाय को भूमि आवंटित नहीं की जाए। यहां पर पॉलीटेक्निक कॉलेज के विस्तार के साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेज के कई नए पाठ्यक्रम संचालित किए जाने वाले हैं। जिनके लिए भवन निर्माण की आवश्यकता होगी। यदि अन्य संस्थाओं को भूमि आवंटित कर दी जाएगी तो कॉलेज का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। बीके माला ने कहा है कि तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के पास वह शिकायत लेकर जाएंगे और उन्हीं के पूर्व के पत्रों का हवाला देंगे कि पहले रोका गया था तो अब क्यों भूमि कोर्ट भवन या अन्य संस्थाओं को आवंटित की जा रही है।

Published On:
Aug, 29 2017 12:06 PM IST

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