MP में कृषि कार्य में सिंचाई की नई दरें लागू करने की तैयारी

By: Manoj Kumar Singh

Updated On:
25 Aug 2019, 07:43:29 PM IST

  • जल संसाधन विभाग किसानों की ले रहा राय

रीवा. किसानों को सिंचाई के लिए दिए जाने वाले पानी का कर बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जलसंसाधन विभाग ने मैदानी स्तर पर सर्वे शुरू किया है। कई गांवों में विभाग के कर्मचारियों ने किसानों से भी संपर्क कर उनकी राय लेने का भी प्रयास शुरू किया है। रीवा सहित प्रदेश के कई हिस्सों से रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, जहां से सिंचाई के जलकर की नई दरें प्रस्तावित की जाएंगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट समय-समय पर सरकार द्वारा मांगी जाती है। जिसमें जिले के सिंचाई से जुड़ा रकबा, किसानों की संख्या और सिंचाई के जलकर आदि की जानकारी भेजी जाती है।

पूरे मामले में किसानों की भी राय दी जाती है। इसी के तहत इस बार भी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। बताया जा रहा कि वर्ष २००५ के बाद से किसानों पर जलकर में कोई वृद्धि नहीं की गई है। बीच में कई बार सरकार ने प्रस्ताव तैयार किए लेकिन उसे मूर्तरूप नहीं दिया जा सका है। जल उपभोक्ता संथाओं की ओर से भी इस संबंध में पहले मांग की जा चुकी है कि जलकर में वृद्धि की जाए। उपभोक्ता संथाओं के लिए आय बढ़ाने का यह प्रमुख माध्यम होगा। वर्तमान में लागू जलकर की राशि बहुत कम है, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसमें कुछ बढ़ोत्तरी होना चाहिए। किसानों को भी आर्थिक रूप से कोई भार नहीं पड़े यह भी देखा जाएगा।

अभी यह किसानों से इस दर पर हो रही वसूली
सिंचाई के लिए दिए जाने वाले पानी को लेकर पूरे प्रदेश में एक ही दर निर्धारित की गई है। जिसमें धान की खेती के लिए 85 रुपए प्रति हेक्टेयर प्रत्येक बार के लिए निर्धारित है। वहीं खरीफ की हरी घास से जुड़ी फसलों उड़द, मूंग, तिल, तुअर, मूगफली, सोयाबीन आदि के लिए 50 रुपए प्रति हेक्टेयर, रबी सीजन में यदि धान के लिए पानी दिया जाता है तो 150 रुपए, गेहूं के लिए 150 रुपए पलेबा और 75 रुपए हर बार के हिसाब से जोड़ा जाता है। रबी सीजन के चना एवं अन्य फसलों के लिए ७५ रुपए, सब्जी एवं उद्यानिकी के लिए 630 रुपए आदि जलकर किया जा रहा है।

औद्योगिक इकाइयों के जलकर की होगी समीक्षा

तीन साल पहले प्रदेश सरकार ने जलकर को लेकर नीति बनाई थी। अब नई सरकार भी इस जलकर की समीक्षा करने करेगी। बीते महीने ही गंगा कछार क्षेत्र में जितनी भी औद्योगिक इकाइयां हैं, उनका ब्यौरा मांगा गया है। रीवा सहित आसपास के जिलों में कई नए उद्योग प्रस्तावित किए गए हैं, लेकिन इन पर कार्य प्रारंभ अब तक नहीं हो सका है। नियम है कि औद्योगिक इकाई जल आंवटन आदेश जारी होने की तिथि से ४८ माह के भीतर औद्योगिक उत्पादन प्रारंभ नहीं करता तो औद्योगिक इकाईआवंटित जल की वार्षिक मात्रा पर देय जलकर तथा उपकर के पांच प्रतिशत के समतुल्य जलकर का भुगतान करेगी। गंगा कछार चीफ इंजीनियर के क्षेत्र में करीब आधा दर्जन से अधिक इकाइयां ऐसी हैं, जिन्होंने समय पर उद्योग चालू नहीं किया और सरकार से जलकर में छूट की मांग भी की है।

Updated On:
25 Aug 2019, 07:43:29 PM IST

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