JANMASHTAMI 2018: जन्माष्टमी मनाने का ये तरीका हैं बहुत ख़ास अगर निभाई जाती है यह खास रस्म तो होती है हर इच्छा पूरी

Tanvi Sharma

Publish: Aug, 31 2018 04:00:01 PM (IST)

जन्माष्टमी मनाने का ये तरीका हैं बहुत ख़ास अगर निभाई जाती है यह खास रस्म तो होती है हर इच्छा पूरी

जन्माष्टमी के आने से पहले ही चारों तरफ कृष्ण की भक्ती व उनके जन्मोत्सव की तैयारियों में लग जाते हैं। देशभर के प्रत्येक कृष्ण मंदिर में जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन यह तयौहार गोकुल में कुछ खास तरह से मनाया जाता है। वहां मनाई जाने वाली रस्म ही कुछ अलग होती है। वैसे तो गोकुल सुनते ही सबसे पहले कृष्ण की छवी सामने आ जाती है और गोकुल की गलियों में आज भी कान्हा के होने का अहसास होता है क्योंकि गोकुल की बनावट व उसके मंदिरों में आज भी अहसास होता है की हम कृष्ण काल में जी रहे हैं। इस साल 2 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस समय पूरा गोकुल कृष्ण भक्ति में लीन रहता है और इस समय वहां की रौनक देखने लायक होती है। गोकुल में श्री कृष्ण का लालन- पालन हुआ था। यहां इस त्यौहार को कई अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है। आइए जानते हैं कितने तरीकों और रस्मों से गोकुल में मनाया जाता है जन्माष्टमी का तयौहार...

 

janmashtami

Janmashtami 2018: जन्माष्टमी से पहले होती छठी पूजा

गोकुल के मंदिरों में कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक एक दिन पहले छठी पूजन होता है। समान्यतः हिंदू धर्म के अनुसार बच्चे के जन्म के 6ठे दिन छठी पूजन किया जाता है) इसलिए गोकुल में कृष्ण जन्माष्टमी के एक दिन पहले यह पूजा करने की रस्म है। इसके पीछे एक कथा प्रचलित है आइए जानते हैं क्या है कारण

गोकुल में छठी पूजने के पीछे कथा ये है कि नंदजी के घर जब वासुदेव जी कृष्ण को टोकरी में रखकर छोड़ कर गए थे, तब कंस ने पुतना को आदेश दिया था कि गोकुल और उसके आस पास छह दिन के भीतर जन्में बच्चे को मार दें। कंस के आदेश पर पूतन ने गोकुल पहुंच बच्चों को मारना शुरू कर दिया, जब इसके बारे में माता यशोदा को खबर मिलीं तो वो कृष्ण को इधर-उधर छुपाने लगीं। जिसके चलते वो छठी की पूजा करना भूल गईं। माता यशोदा ने कृष्ण को छुपाने की बहुत कोशिश की इसके बावजूद पुतना श्रीकृष्ण को उठा कर ले जाने में कामयाब रही। उसके बात पूतना ने स्तनपान करना शुरू किया तभी कृष्ण ने पूतना के स्तन में जोर से काट लिया जिससे उसकी मृत्यु हो गई। आखिर श्रीकृष्ण तो भगवान विष्णु का साक्षात अवतार थे।

janmashtami

JANMASHTAMI 2018: बुजुर्ग महिलाओं ने दिलाया था यशोदा मैय्या को याद

कान्हा के जन्म के एक साल बाद जब जन्मतिथि आई तो यशोदा मईया ने गोकुल वासियों को कृष्ण जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए न्यौता दिया तब बुजुर्ग महिलाओं और ब्राह्मणों नें यशोदा मईया से कृष्ण की छठी पूजन करने को कहा। तब माता यशोदा ने कृष्ण के जन्म के एक दिन पहले उनकी छठी पूजी और फिर उनका जन्मदिन मनाया। बस, तभी से गोकुल में यह प्रथा चली आ रही है कि जन्माष्टमी से एक दिन पहले कान्हा की छठी की पूजा की जाती है।

More Videos

Web Title "JANMASHTAMI 2018: rituals of gokul in janmashtami"