विचार मंथन : गणेश चतुर्थी व्रत के फल स्वरूप ही पाण्डवों ने महाभारत संग्राम में विजय श्री पाई थी- युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा

By: Shyam Kishor

Published On:
Sep, 12 2018 06:11 PM IST

  • गणेश चतुर्थी को श्रद्धापूर्वक व्रत करने वाले की सभी मनोकामनाएँ सिद्ध होती हैं

    युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा

सभी प्रकार शुभफलदाता गणेश चतुर्थी का व्रत

भाद्रपद मास की शुक्लपक्ष की चौथ को गणेश जी का व्रत किया जाता है, क्योंकि उनका जन्म उसी दिन माना गया है । इसी दिन से देशभर में दस दिनों तक या पूर्णिमा तक गणेशोत्सव मनाया जाता हैं । गणेश जी सबसे अधिक लोकप्रिय देवता हैं । प्रत्येक शुभ कार्य में सर्वप्रथम उन्हीं की पूजा-अर्चना की जाती है । साधारण व्यावहारिक निमंत्रण पत्रों से लेकर बड़े-बड़े ग्रंथों के आदि में ‘श्री गणेशाय नमः’ लिखने की प्राचीनतम प्रथा है । गणेश जी को जब पिता शिवजी ने पूरे ब्रह्माण्ड की परिक्रमा की आदेश दिया तो श्री गणेशजी ने अपने विवेक का प्रयोग कर अपने माता पिता की ही परिक्रमा कर लीं, जिससे भगवान शंकर ने अत्यंत प्रसन्न होकर गणेश को देवों में प्रथम पूजे जाने का आशीर्वाद दिया, तभी से गणेश जी सभी मंगल शुभ कार्यों में पहले पूजे जाने लगें ।


सिद्धि सदन और विद्यावारिधि गणेशजी आठों सिद्धियों और नव निधियों के देने वाले हैं । गणेश चतुर्थी को लोग दिन भर व्रत रखते हैं । चार घड़ी रात बीतने पर जब आकाश में चन्द्रमा दिखलाई पड़ता है, तो आँगन में पवित्र किये स्थान पर ताँबे या मिट्टी का कलश जल से भर कर उसके ऊपर चाँदी, पीतल या मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करके विधिवत् उनकी पूजा करते हैं । इसके बाद गणेश जी प्रसाद लड्डू आदि ग्रहण करते हैं ।

 

जो लोग श्रद्धापूर्वक गणेश चतुर्थी का व्रत करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएँ सिद्ध होती हैं । स्कन्द पुराण में लिखा है कि श्रीकृष्णजी के उपदेश से युधिष्ठिर महाराज ने इस व्रत को किया था, जिससे महाभारत संग्राम में पाण्डवों की विजय श्री हुई थी । तब से इस व्रत का विशेष प्रचार हुआ ।

 


इस प्रकार गणेश जी का व्रत सब कामनाओंं को पूर्ण करने वाला है । निष्ठा के साथ इस व्रत के करने से हर तरह की समस्यायों का समाधान हो जाता है, ऐसी इस व्रत को करने की महिमा है ।

( युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा )

Published On:
Sep, 12 2018 06:11 PM IST