बिल्डिंग या मॉल्स में नहीं वसूल सकते पार्किंग चार्ज, फिर भी हो रही मनमानी वसूली

By: Sunil Sharma

Published On:
Sep, 02 2017 04:16 PM IST

  • पत्रिका टीम ने पूरे मामले की हकीकत जानने के लिए शहर के प्रमुख तीन मॉल्स में जाकर स्टिंग किया

जयपुर। राजधानी के बड़े-बड़े मॉल्स की पार्किंग में वाहन खड़े रखने के नाम पर खुले में अवैध वूसली चल रही है। जबकि ऐसा कोई नियम नहीं। खास बात है कि इन मॉल्स में राजधानी के सैकड़ों लोग वाहन खड़ा करने रोजाना आते हैं। जिनसे 40-50 रुपए की वसूली पार्किंग शुल्क के नाम कर ली जाती है।

ऐसे में पार्किंग मॉल्स संचालकों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन गई है। गौर करने की बात है कि मॉल्स में ये पार्किग लोगों की सहूलियत के लिए होती है, जिनमें कोई चार्ज देने का नियम ही नहीं है। लेकिन राजधानी के लगभग हर मॉल में नियमों की अवहेलना कर वसूली की जा रही है। पत्रिका टीम ने पूरे मामले की हकीकत जानने के लिए शहर के प्रमुख तीन मॉल्स में जाकर स्टिंग किया तो तीनों ही जगह पार्किंग शुल्क के नाम पर अवैध वसूली का खेल चलता मिला।

जो वसूल रहे हैं उन्हें पता तक नहीं
मॉल्स में पार्किग वसूली करने के लिए अलग से कर्मचारी लगाए हुए हैं। इन कर्मचारियों को पता तक नहीं है कि जो काम वह कर रहे हैं, वह अवैध है। इनका तर्क हैं कि मॉल संचालक की ओर से ही पार्किंग शुल्क तय किया हुआ है। कई जगह पर पार्किग का ठेका दे दिया जाता है।

केस 1
25 फीसदी बढ़ाया शुल्क
गोविन्द मार्ग, पिंक स्क्वायर मॉल में दोपहिया वाहन पर एक साथ 25 फीसदी शुल्क बढ़ा दिया। चौपहिया वाहन चालक से भी 30 रु. शुल्क लिया जा रहा है। सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। पार्किंग कर्मियों ने मॉल संचालक से बात करने का तर्क देकर बिना शुल्क अंदर जाने से रोक दिया।

केस 2
शुल्क दो, फिर खुद तलाशते रहो जगह
मालवीय नगर, गौरव टावर के पास मॉल में 30 रु. वाहन शुल्क लिया। पार्किंग ठेकेदार को शुल्क नहीं लेने का प्रावधान बताया, दो टूक कहा हमने ठेका लिया तो आपको पैसे देने ही होंगे। यहां भी शुल्क दिया और भीतर गए।

केस 3
सुविधा शुल्क पर मनमानी
वल्र्ड ट्रेड पार्क में मनमाना पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। यहां एक चौपहिया वाहन का पार्किंग शुल्क 40 रुपए लिया जा रहा है, यह भी केवल 4 घंटे तक मान्य है। इसके बाद 5 रुपए प्रति घंटा शुल्क अलग है।

बिल्डिंग बायलॉज में यह है प्रावधान
विकासकर्ता द्वारा अनुमोदित भवन मानचित्र में बेसमेंट, स्टिल्ट, खुले क्षेत्र के जिस भाग को पार्किंग के उपयोग में दर्शाया है, उसके लिए भवन निर्माणकर्ता जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम के हक में अंडरटेकिंग तथा शपथ पत्र देगा। इसे केवल पार्किंग के लिए उपयोग किया जाएगा।

विकासकर्ता पार्किंग क्षेत्र को अधिकार पत्र के माध्यम से पार्किंग उपयोग के लिए अधिकृत कर सकेगा, इसका मतलब बेचान, लीज, ठेके पर देने से नहीं है। मॉल्स, कमर्शियल कॉम्पलेक्स में भी पार्किंग सुविधा के लिए है। यहां आने वाले लोगों से पार्किंग के नाम पर शुल्क नहीं लिया जा सकता है।

Published On:
Sep, 02 2017 04:16 PM IST

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