विभागीय प्रक्रिया में उलझ रहे इस जिले के अन्नदाता, नहीं मिल रहा लाभ

Gourishankar Jodha

Publish: Sep, 12 2018 12:33:46 PM (IST)

विभागीय प्रक्रिया में उलझ रहे इस जिले के अन्नदाता, नहीं मिल रहा लाभ

रतलाम। शासकीय प्रक्रिया में उलझकर अन्नदाता परेशान है, फसल बीमा जमा कराया, लेकिन नुकसानी के बाद लाभ नहीं मिलना, तो कही पंजीयन के लिए घंटों इंतजार कर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। किसी को अब तक गेहूं की प्रोत्साहन राशि नहीं मिली, खेतों में खरीफ में लगाई सोयाबीन की फसल खराब होने पर बीमा कम्पनी न कृषि विभाग का अमला पहुंच रहा है, ताकि पंचनामा बना सके। किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही, फसल बीमा नहीं मिलने से नाराज किसान अब खरीफ पंजीयन में खाता-खसरा तो कभी सर्वर के चक्कर में केंद्रों पर दिन काट रहे हैं। 20 सितंबर पंजीयन की अंतिम तारिख है तो केंद्रों पर भीड़ भी लगना शुरू हो गई है। सोयाबीन की पीला मौजेक आदि कीटों से नष्ट होती फसलों के लिए सर्वे दल सदस्य तक मौके पर नहीं पहुंच रहे। कई किसानों के तकनीकी त्रुटि के कारण अटके गेहूं के 265 रुपए प्रति क्विंटल के नाम से तक नहीं डाले गए, जिसके चलते विभागों के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं।

 

मामला १- अब तक नहीं मिली प्रोत्साहन राशि
गेहूं खरीदी के बाद सरकार द्वारा 10 जून को किसानों के खाते में प्रति क्विंटल के मान से 265 रुपए तो डाली, लेकिन तकनीकी त्रुटि के कारण 472 कृषकों के खाते में अब तक राशि नहीं पहुंची है। तीन माह हो गए, किसान अब तक राशि का इंतजार कर रहे, तो विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। रिंगनिया के अरविंद पाटीदार ने बताया कि मैरा करीब 85 क्विंटल गेहूं का पैमेंट बाकि है, प्रदेश मुख्यमंत्री ने मंच से कहा था कि यह प्रोत्साहन राशि और खाद बीज के लिए दे रहा हूं, लेकिन अब सोयाबीन पकने आ गई है राशि नहीं मिली। कृषि विभाग के अधिकारी भी संतुष्टीपूर्ण जवाब नहीं दे रहे हैं, जबकि लिस्ट में नाम है।

मामला 2- फसलें खराब, सर्वेयर नहीं आ रहे
रतलाम सहित सैलाना, बाजना, पिपलौदा, आलोट आदि विकासखंडों में पीला मोजेक व कीटों के कारण बड़ी मात्रा में सोयाबीन के खेत के खेत नष्ट हो गए है। बाजना खेड़ा नंदकिशोर पाटीदार व जड़वासाखुर्द के भरत पाटीदार और हरिश पाटीदार ने बताया कि करीब 50 बीघा का नुकसान हुआ है। बीमा कम्पनी और कृषि विभाग को भी मोबाइल लगाया लेकिन अब तक कोई नहीं आया, जबकि पिछले साल का भी बीमा लाभ नहीं मिला है। ऋणि किसान होने के बावजूद कोई ना तो बीमा कम्पनी और ना ही विभाग वाले सुनवाई कर रहे हैं। जबकि फसल पूरी तरह पीला पड़कर नष्ट हो गई है।

 

मामला 3-नहीं मिला फसल बीमा, लगा रहे चक्कर
जिले के अधिकांश गांवों को फसल बीमा नहीं मिला, कई किसानों को तो इसलिए छोड़ दिया कि उनकी जमीन उस गांव में है, लेकिन वे रहते दूसरे गांव में है। पवन जाट, जगदीशचंद्र ने बताया कि इस संबंध में कृषि विभाग को भी कई गांवों के किसानों ने लिखित में शिकायत की, जिसे विभाग ने भी सही माना है। लेकिन बैंक वालों से जानकारी लेने पर वह सहयोग नहीं कर रहे हैंं। हतनारा, बड़ोदिया, जड़वासा, रिंगनिया सहित कई ऐसे कई गांव है जहां के किसानों को लाभ नहीं मिला। वर्तमान में जंगली सुअर, घोड़ारोड और लक्कडबग्घा फसलों के नष्ट कर रहे हैं। इस संबंध में भी वनविभाग को ज्ञापन सौंपा।

मामला-4- सर्वर जाम, केंद्रों पर कट रहे दिन
खरीफ उपार्जन के लिए पंजीयन के दौरान केंद्रों पर सर्वर के चक्कर में पंजीयन की धिमी गति को देखते हुए कलेक्टर ने भी अधिकारियों को जमकर लताड़ा, लेकिन व्यवस्था अब भी जस की तस बनी हुई है। पिछले साल की तुलना में अब तक लक्ष्य पूर्ति से आंकड़ा काफी दूर है। पूर्व में 46 पंजीयन केन्द्र स्थापित किए गए थे। पंजीयन कार्य में तेजी लाने के लिए 31 अतिरिक्त पंजीयन केन्द्र भी स्थापित किए गए हैं, लेकिन फिर भी किसानों की भीड़ केंद्रों पर दिन भर देखी जा रही है। किसान इन केन्द्रों पर निर्धारित तिथि 20 सितंबर तक प्रात: 7 से रात्रि 7 बजे तक जाकर अपना पंजीयन करवा सकते हैं।

तकनीकी त्रुटि से अटकी राशि
तकनीकी त्रुटि के कारण गेहूं के 265 रुपए प्रोत्साहन राशि करीब 427 किसानों के खाते में डाली जाने वाली राशि अटकी हुई है, कर्मचारी उस पर काम कर रहे हैं शीघ्र ही डाली जाएगी। फसल बीमा योजना लाभ जिन किसानों को नहीं मिला है, उनकी भी शिकायतें मिल रही है।
जीएस मोहनिया, उपसचालक कृषि रतलाम

 

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