नि:शुल्क शिक्षा पाने भटक रहे बच्चे, सैकड़ों सीटे रह गई खाली

By: Nakul Ram Sinha

Published On:
Jul, 12 2019 05:04 AM IST

  • शिक्षा का अधिकार कानून का बन रहा मजाक

राजनांदगांव / डोंगरगढ़. नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून जिले में मजाक बन कर रह गया है क्योंकि अधिनियम की धारा 8 के अनुसार गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और अनिवार्य दाखिले उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा पूर्ण और सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग बाध्य है लेकिन सत्र 2018-19 में जिले में 1429 पात्र गरीब बच्चों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया था और लगभग 2400 सीट्स रिक्त था लेकिन आज तक इस वेटिंग लिस्ट और रिक्त सीटों को भरा नहीं गया। हाईकोर्ट बिलासपुर का आदेश 14 सितंबर 2016 में यह स्पष्ट लिखा है कि आरटीई की हर रिक्त सीटों को भरा जाए। इस सत्र 2019-20 में लगभग 2400 सीट्स रिक्त है और लगभग 387 पात्र आवेदन होने के बावजूद उन्हें अभी तक स्कूल आबंटित नहीं किया गया है।

मौलिक अधिकार का हो रहा हनन
शिक्षा सत्र 2019-20 के लिए स्कूल 1 अप्रैल से आरंभ हो चुका है और पुन: 24 जून से स्कूल प्रारंभ हो चुका है और आरटीई एडमिशन अभी तक पूर्ण नहीं किया जा सका है। पात्र गरीब बच्चे प्रवेश पाने भटक रहे है। जिले में विगत एक वर्ष से गरीब बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। पात्र गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। रिक्त सीटों को जानबूझकर भरा नहीं जा रहा है।

नि:शुल्क शिक्षा पाना हो रहा कठिन
छग पैरेंट्स एसोसियेशन के लोग विगत एक वर्ष से ज्यादा से ज्यादा गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दिलवाने के लिए डीईओ, डीपीआई और हाईकोर्ट के चक्कर काटते-काटते थक गए लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारियों के कानों में जंू तक नहीं रेंग रहा है। शिक्षा विभाग रिक्त सीटों की जानकारी तक सार्वजनिक नहीं करता जो जानकारी दिया जाता है उसके अनुसार भर्ती नही लिया जाता है। नोडल अधिकारियों की मनमानी भी खुलकर सामने आई लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई अब तक नहीं किया गया। अब पीडि़त पालक जाए तो कहां करे तो क्या क्योंकि जिले में नि:शुल्क शिक्षा पाना इतना सरल नहीं है जितना कानून की किताब में लिखा है। जैसे-तैसे जिनको प्रवेश मिल भी गया तो ड्रेस कॉपी, किताब, जूता, मोजा खरीदने में पालकों के पसीने छुट जाते है क्योंकि शिक्षण शुल्क को छोड़ बाकी सभी चीजे पालकों को ही लेना पड़ रहा है। हाईकोर्ट का आदेश हो या कानून की किताब में लिखी बातें गरीब बच्चों को शिक्षा नि:शुल्क दिला पाने में काफी नहीं है।

Published On:
Jul, 12 2019 05:04 AM IST

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