हजारों साल पुराना हैं छत्तीसगढ़ का ये गणेश मंदिर, दर्शन करने से ही हो जाती हैं सारी मुरादें पूरी

By: Deepak Sahu

Updated On: Sep, 15 2018 12:27 PM IST

  • दर्शन मात्र से ही भक्तों की हो जाती हैं सारी मुरादें पूरी

रायपुर. गणेश चतुर्थी पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है। हर तरफ गणपति की प्रतिमाएं सज चुकी हैं। 10 दिन तक चलने वाला यह उत्‍सव गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्‍त होता है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्‍त प्‍यारे बप्‍पा की मूर्ति को घर लाकर उनका सत्‍कार करते हैं। फिर 10 वें दिन यानी कि अनंत चतर्दशी को विसर्जन के साथ मंगलमूर्ति भगवान गणेश को विदाई जाती है। साथ ही उनसे अगले बरस जल्‍दी आने का वादा भी लिया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा गणेश मंदिर जहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।

छत्तीसगढ़ में गीदम के जंगलों के बीच एक अनोखा गणेश मंदिर है। यहां विघ्नहर्ता का जुड़वां स्वरुप विराजित है। जी हां बारसूर इलाके में जुड़वां गणपति है। यहां बप्पा की एक जैसी 2 मूर्तियां है। फर्क बस इतना है कि एक बड़ी तो दूसरी छोटी है। इन मूर्तियों की खासियत ये है कि यह दोनों ही मोनोलिथिक है। लोगों की मान्यताएं है कि यहां आकर दर्शन करने वालों के कष्ट विघ्नहर्ता हर लेते है।

 

ganesh temple

कहा जाता है कि इस मंदिर को यहां के राजा ने अपनी बेटी के लिए बनवाया था।राजा बाणासुर का वर्णन पुराणों में मिलता है, उनके नाम पर ही इस नगर का नाम बारसूर पड़ा। राजा की बेटी उषा और उनके मंत्री की बेटी चित्रलेखा आपस में पक्की सहेलियां थीं। दोनों गणेश जी की भक्त थीं पर आस-पास गणेश जी का कोई मंदिर नहीं था। इस वजह से दोनों मन ही मन गणेश जी की अराधना करती थी। उषा ने मंदिर न होने की बात अपने पिता से कही।

फिर क्या था बाणासुर ने दोनों सहेलियों के लिए गणेश जी की मूर्तियों का निर्माण करा दिया। यह अनोखा मंदिर जुड़वा प्रतिमाएं में विराजमान है। दोनों सहेलियां रोज उस मंदिर में गणेश जी की पूजा करने जाया करती थीं। कहा जाता है कि गणपति उषा और चित्रलेखा की साधना से प्रसन्न हुए थे और तब से यहां आने वाले अपने सभी भक्तों की हर कामना पूरी करते हैं।

बारसूर में कभी 147 मंदिर और अनेक तालाब हुआ करते थे। बारसूर को तालाबों और मंदिरों का शहर कहा जाता था। जहां कभी 147 मंदिर हुआ करते थे वहां आज सिर्फ 5 या 6 मंदिर बचे हुए है। अधिकांश तालाब सूख चुके गए।

Published On:
Sep, 15 2018 06:00 AM IST

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।