अठावले का मायावती पर निशाना, कहा: बौद्ध धर्म अपना लें

  • महाराष्ट्र के प्रख्यात दलित नेता और रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया के अध्यक्ष आठवले ने दलितों से बौद्ध धर्म अपनाने को भी कह डाला
नई दिल्ली। गौरक्षा के नाम पर देश में लगातार घटनाएं हो रही हैं और सामाजिक माहौल भी आक्रोश वाला है। ऐसे में दलित नेता और हाल ही में केन्द्रीय मंत्रिमंडल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री के रूप में शामिल किए गए दलित नेता रामदास बंडु आठवले के एक बयान से राजनीतिक आक्रोश और भड़क सकता है। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में अठावले ने मायावती पर जोरदार हमला करते हुए बोला है कि मायावती बाबा साहेब आंबेडकर के नाम पर राजनीति तो करती हैं लेकिन,उनके आदर्शों को नहीं मानती।

मोदी दलित विरोधी नहीं: अठावले
महाराष्ट्र के प्रख्यात दलित नेता और रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया के अध्यक्ष आठवले ने दलितों से बौद्ध धर्म अपनाने को भी कह डाला। उन्होंने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती को भी ऐसा कर लेना चाहिए।  इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मोदी दलित विरोधी नहीं हैं। कुछ नेताओं की वजह से विवाद हो रहा है। साथ ही यह भी कहा कि मायावती को गाली देने वाले दयाशंकर को निकालकर बीजेपी ने सही किया। गौरतलब है कि इसी गाली के बाद मायावती को बीएसपी को लामबंद करने का मौका मिल गया है।




मायावती पर साधा निशाना
आठवले ने दलितों के नेता के रूप में मायावती की स्थिति पर बोलते हुए कहा कि यदि मायावती सच्ची अम्बेडकरवादी होने का दावा करती हैं तो उन्होंने अभी तक बौद्ध धर्म क्यों नहीं अपनाया। वह मनुवाद की आलोचना करती हैं, धर्मान्तरण पर बात करती हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक बौद्ध धर्म स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि दलितों के वोट पर मायावती का एकाधिकार नहीं है। यूपी हमारी पार्टी आरपीआई की भूमि रही है। हमारी धरती पर मायावती ने कब्जा कर लिया है। मैं उनसे अपनी जमीन वापस लेकर रहूंगा। अगर मैं उन्हें बेदखल करने में सफल नहीं भी रहा तो मैं अपने हिस्से की कुछ जमीन तो वापस हासिल कर ही लूंगा।

दलितों की पिटाई से उबला था उना

गुजरात में दलितों की पिटाई के मुद्दे पर आठवले ने स्पष्ट कहा कि गौरक्षा से पहले मानव रक्षा जरूरी है। उन्होंने कहाए कि मैं खुद बौद्ध हूं और मानता हूं कि गायों की रक्षा होनी चाहिए। मैं हिंदू धर्म मानने वालों की भावनाओं का भी सम्मान करता हूंए लेकिन गौ रक्षकों को भी कानून के दायरे में रहना चाहिए। दलितों पर अत्याचार या दादागिरी बर्दाश्त नहीं कर सकते। उल्लेखनीय है कि हाल में पूरे गुजरात में उना में गौरक्षा के नाम पर हुई दलितों की पिटाई से हिंसा भड़क उठी थी। बाद में एक चश्मदीद गवाह के बयान को आधार पर सीआईडी ने खुलासा किया था कि गाय को दलित परिवार ने नहीं, बल्कि एक शेर ने मारा था। इसके अलावा दादरी में गौ मांस रखने के नाम पर भीड़ ने अखलाक की हत्या कर दी थी। फरीदाबाद में दो लोगों को गौ मांस ले जाने के आरोप में गोबर खिलाया गया था।

गौ रक्षा करेंगे तो मानव रक्षा कौन करेगा
उन्होंने कहा है कि मानव जीवन की कीमत पर गायों का संरक्षण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि गुजरात के उना में गौरक्षा के नाम पर हुई दलितों की पिटाई जैसी घटनाएं फिर न हों। उना की घटना को गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा कि मैं गौ रक्षकों से पूछना चाहता हूं कि जब देश में गौहत्या के खिलाफ कानून है तो फिर भी गौ सरंक्षण जारी रखना चाहते हैं। यदि आप गौरक्षा करते हैं तो फिर मानव की रक्षा कौन करेगा?
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