सिक्खों के पवित्र धाम हेमकुंड साहिब के कपाट खुले, जो बोले सो निहाल के जय घोष के साथ हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरु

By: Tanvi Sharma

Published On:
May, 27 2018 03:20 PM IST

  • सिक्खों के पवित्र धाम हेमकुंड साहिब के कपाट खुले, जो बोले सो निहाल के जय घोष के साथ हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरु

सिक्ख समुदाय के पवित्र धाम हेमकुंड साहिब के कपाट शुक्रवार 25 मई को खुल गए हैं। कपाट खुलने के साथ ही हेमकुंड साहिब यात्रा शुरू हो गयी है, जो बोले सो निहाल के जय घोष के साथ हेमकुंड साहिब के लिए घांघरिया से पंच प्यारों की अगुवाई में यात्रियों का जत्था हेमकुंड के लिए रवाना हुआ।

हेमकुंड साहिब इस समय पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ है। गोविन्दघाट में अब तक लगभग 5 हजार श्रृद्धालु पहुंच चुके हैं। इस बार यात्रा में प्लास्टिक पूरी तरह से बैन कर दिया गया है। गोविंद घाट से हेमकुंट साहिब तक यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं के लिए पानी और जनसुविधाओं की व्यवस्था की गई है। गुरुद्वारे के दर्शन को जाने वाले यात्रियों के लिए गोविंद घाट से पुलना गांव तक पहुंचने के लिए टैक्सी की सुविधा की गई है। इसी के साथ पैदल यात्रियों के लिए घोड़े, खच्चर, डंडी की व्यवस्था भी कि गाई है। गुरुद्वारों में अतिरिक्त सेवादार भी लगाए गए हैं। हेमकुंट साहिब के रास्ते से बर्फ हटाने का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। हेमकुंट साहिब के कपाट अक्टूबर में बंद होंगे। इस बार पंजाब से स्वंय सेवकों का एक बैंड कपाटोत्घाटन पर हेमकुंड पहुंचा है।

 

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गोविन्दघाट से शुरु होती है हेमकुंड की पैदल चढ़ाई

गोविन्दघाट से हेमकुड की पैदल चढ़ाई शुरू होती है। घांगरिया पहुंचने के लिए आपको 15 किमी का पैदल रास्ता पार करना पड़ता हैं, जो इस यात्रा का रात्री पड़ाव है। घांगरिया में रात्री पड़ाव के लिए आपको 100 से अधिक लाज और ढाबे मिलेंगे। यहां से सुबह ५ किमी की चढ़ाई पार कर के आप हेमकुंड साहिब पहुंच सकते हैं। इसी चढ़ाई वाले मार्ग में अलटाकोटी नामक स्थान में 100 मीटर लंबा ग्लेशियर पसरा हुआ है, जिसे काटकर इसके बीचों बीच से यात्रा के लिए रास्ता बनाया गया है।

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हेमकुंड साहिब तक ऐसे पहुंच सकते हैं आप

देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार निकटतम रेलवे स्टेशन है। जबकि देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक देश के विभिन्न हिस्सों से हवाई सेवाएं संचालित होती हैं। यहां से गोविंदघाट तक बस-टैक्सी या निजी वाहन से पहुंचा जा सकता है। गोविंद घाट से पैदल रास्ता है। देहरादून से जोशीमठ की दूरी 289 किमी, ऋषिकेश से जोशीमठ की दूरी 254 और हरिद्वार से जोशीमठ की दूरी 279 किमी है। सबसे पहले यात्रियों के लिए जोशीमठ मुख्य बाजार में एक गुरुद्वारा है, जहां एक हजार लोग ठहर सकते हैं। जोशीमठ से 22 किमी आगे गोविन्दघाट में एक विशाल गुरुद्वारा हैं। इसमें दस हजार लोग ठहर सकते हैं। गोविन्दघाट से 15 किमी चढ़ाई के बाद भ्यूंडार में भी एक गुरुद्वारा है। इसमें लगभग साढ़े छह हजार श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था है।

Published On:
May, 27 2018 03:20 PM IST