यहां सुदर्शन को माना जाता है चौथी अहम दैवीय शक्ति, जानें इस मंदिर की वास्तुकला

By: Tanvi Sharma

Published On:
Jul, 04 2018 06:53 PM IST

  • यहां सुदर्शन को माना जाता है चौथी अहम दैवीय शक्ति, जानें इस मंदिर की वास्तुकला

भगवान जगन्नाथ का मंदिर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पुरी दुनिया में प्रसिद्ध है। उड़िसा राज्य के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ स्वामी का मंदिर कृष्ण भक्तों की आस्था का केंद्र तो है ही बल्कि वास्तुकला का भी एक केंद्रित बिंदू है। मंदिर की बनावट इस तरह से की गई है की इससे जुड़े कुछ राज़ अब तक कई बड़े इंजिनियर भी नहीं कर पाए हैं। कलिंग शैली में बना यह मंदिर नक्काशियों का भी अच्छा उदाहरण है। जगन्नाथ मंदिर समुद्रतट से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित है। सागर में अस्त होते सूर्य के दर्शन कर जगन्नाथ जी की आरती में शामिल होना एक पवित्र अनुभव से गुजरना है। आइए आपको बताते हैं भगवान जगन्नाथ के इस अद्भुत व प्रसिद्ध मंदिर की वास्तुकला के बारे में कुछ रोचक बातें।

 

jagannath yatra

जगन्नाथ मंदिर में कई देवता स्थापित हैं, किन्तु मंदिर को जगन्नाथ मंदिर कहा जाता है। प्रभु जगन्नाथ के साथ यहां दो अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है। मंदिर के गर्भग्रह में श्री माधव, जगन्नाथ, श्रीदेवी और भूदेवी की एक प्रतिकृति स्थापित है। और इसकी पूजा गर्भग्रह में की जाती है। श्री जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा की पूजा की जाती है। ये तीन, मूल और मौलिक त्रिमूर्ति का गठन करते हैं और उन सभी को सर्व-वर्तमान, सर्व-वैज्ञानिक और सर्वव्यापी सर्वोच्च शक्ति का रूप मानते हैं। इन्हीं के साथ चौथी अहम दैवीय शक्ति सुदर्शन को माना जाता है। और इन तीन देवताओं के साथ सुदर्शन की भी पूजा की जाती है। जब ये चारों दैवीय शक्ति मिलती है तो इन चारों को चार गुना दैवीय छवियों का रूप माना जाता है।

वहीं जगन्नाथ पुरी का मुख्य मंदिर लगभग 30 छोटे व बड़े मंदिरों से घिरा हुआ है। इन मंदिरों की अपनी अलग समय-सीमा निर्धरित है, जिसके आधार पर इन्हें इतिहास में रखा गया है।

Published On:
Jul, 04 2018 06:53 PM IST