नौनिहालों के दूध के चाहिए थे 7 करोड़, सरकार ने दिए सिर्फ 3 करोड़, शिक्षक बोले : अब दूध वाले करते हैं आनाकानी

By: Suresh Hemnani

Updated On:
10 Sep 2019, 03:15:12 PM IST

  • -पाली जिले के साथ प्रदेश के स्कूलों के लिए नहीं दिया जा रहा दूध का बजट
    -जिले में चार माह के लिए चाहिए थे 7.20 करोड़, सरकार ने 3.2 करोड़ देकर टरका दिया

-राजीव दवे
पाली। सरकारी स्कूलों [ Government school ] में प्रार्थना सभा के समय बच्चों को दूध पिलाने की योजना तो शुरू कर दी गई, लेकिन उसके लिए बजट [ Rajasthan government budget ] की व्यवस्था अब तक ढंग से नहीं की जा सकी है। हालात यह है कि जिले के साथ प्रदेश में पहले तो चार माह तक नाम मात्र का बजट दिया गया। जब योजना पर संकट मंडराने लगा तो आधी-अधूरी राशि देकर टरका दिया गया। पाली जिले में चार माह की मांग 7.20 करोड़ के मुकाबले हाल ही में महज 3.2 करोड़ रुपए दिए गए है। इस राशि को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय [ District Education Officer Office ] की ओर से बांट तो दिया गया। इसके बावजूद अभी तक स्कूलों को पर्याप्त बजट नहीं मिला है। स्कूलों से दूध वाले रोजाना रुपयों का तकाज कर दूध देना बंद करने का कहते हैं। इस पर शिक्षक [ teacher ] अपने पैसों से या दूध वाले को समझा कर काम चलाने को मजबूर हैं।

पाली में हर माह जरूरत 1.80 करोड़ की
पाली जिले के प्रारम्भिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों [ Elementary and upper primary school ] में 1 लाख 17 हजार बच्चे पढ़ते है। इसी तरह माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों [ Secondary and Higher Secondary School ] में 72 हजार बच्चों को दूध पिलाया जाता है। इन 1 लाख 89 हजार बच्चों के लिए हर माह दूध की व्यवस्था करने के लिए 1.80 लाख रुपए चाहिए।

एक माह की राशि अभी तक शेष
शिक्षा विभाग [ Education Department ] के अधिकारियों की माने तो दूध का पैसा हर माह नहीं मिल रहा है। पाली जिले में अभी वे एक माह में दूध पर खर्च होने वाली राशि बकाया बता रहे हैं। ऐसा ही हाल प्रदेश के अन्य जिलों का भी है। हालांकि इस बारे में जिलों से आयुक्त मिड डे मील को मांग भेजी जा रही है, लेकिन बजट समय पर नहीं मिल रहा।

बजट की मांग कर रखी है
कमिश्नर मिड डे मील [ mid day meal ] से बजट की मांग कर रखी है। जिस तरह बजट आ रहा है। उसे स्कूलों में वितरित कर रहे हैं। संस्था प्रधानों को दूध में पोषाहार में से राशि उपयोग लेने के निर्देश दिए है। -रामस्वरूप जांगिड़, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक, पाली

दूध वाले करते हैं आनाकानी
दूध देने वाले आनाकानी कर करते है। इस पर शिक्षकों को अपने व्यवहार पर या जेब से रुपए देकर दूध मंगवाना पड़ रहा है। बजट लम्बे समय से समय पर नहीं आ रहा है। -नंदकिशोर शर्मा, जिलाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत

Updated On:
10 Sep 2019, 03:15:12 PM IST

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