क्या विवाद जरूरी है?

By: Dilip Chaturvedi

Published On:
Jun, 09 2019 04:39 PM IST

  • धोनी यह बोल चुके हैं कि अगर वह क्रिकेटर नहीं होते तो सेना का हिस्सा जरूर होते। उनकी भावनाओं का सम्मान आइसीसी को करना चाहिए।

भारत से लेकर पूरी दुनिया में इस समय क्रिकेट का खुमार छाया हुआ है। विश्व कप में हर टीम बेहतर करने की कोशिश में जुटी हुई है। भारतीय टीम ने भी जीत के साथ अपना आगाज किया है। भारतीय प्रशंसक अपनी जीत का जश्न ढंग से मना भी नहीं पाए थे कि पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर विवाद सामने आ गया। दरअसल, महेंद्र सिंह धोनी 5 जून को दक्षिण अफ्रीका के साथ मुकाबले में अपने कीपिंग ग्लव्स पर बलिदान बैज लगाकर मैदान में उतरे थे। जिस पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आइसीसी) ने आपत्ति ली है।

आइसीसी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) को साफ कहा कि वह धोनी को निर्देशित करे कि वह इस बैज का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इससे धोनी समर्थकों में नाराजगी का माहौल है। दुनिया भर में इस पर बहस शुरू हो गई है। कोई धोनी के पक्ष में खड़ा है तो कोई आइसीसी के पक्ष में। विवादों के बीच बीसीसीआइ ने खुद आइसीसी से अपील की है कि वह धोनी को इस बैज के इस्तेमाल की इजाजत दे। इस बीच पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी ने इस विवाद पर ट्वीट कर आग में घी डालने का काम कर दिया।

उन्होंने ट्वीट में लिखा कि धोनी इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने गए हैं न कि महाभारत के लिए। भारतीय मीडिया मूर्खतापूर्ण बहस कर रहा है। अगर भारतीय मीडिया के किसी वर्ग को युद्ध से इतना ही प्रेम है तो उन्हें सीरिया, अफगानिस्तान या रवांडा भेज दिया जाना चाहिए। इस ट्वीट के बाद बलिदान बैज का मुद्दा खेल के मैदान से बाहर निकलकर राजनीतिक मैदान पर आ गया। नेता और क्रिकेट की राजनीति करने वाले राजीव शुक्ला ने भी फवाद के बयान पर आपत्ति जाहिर की और कहा कि बीसीसीआइ इस मसले को आगे लेकर जाएगी। धोनी को बैज लगाने की मंजूरी मिलनी चाहिए। इसमें कुछ भी व्यावसायिक नहीं है और न ही नियम टूट रहे हैं।

हालांकि आइसीसी नियमों के हिसाब से तय ड्रैस के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। ड्रेस पर तीन से ज्यादा लोगो नहीं लगाए जा सकते हैं। न ही खिलाड़ी आर्म बैंड या ड्रेस के जरिए कोई राजनीतिक, धार्मिक और नस्लीय संदेश दे सकते हैं। कीपिंग ग्लव्स पर भी निर्माता के अतिरिक्त किसी का भी लोगो लगाने की मंजूरी आइसीसी नियमों में नहीं है। हालांकि आइसीसी की पूर्व मंजूरी के बाद इसमें बदलाव संभव है। धोनी ने पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए बलिदान बैज का उपयोग अपने कीपिंग ग्लव्स पर किया है।

यह बैज पैरामिलिट्री फोर्स के जवान इस्तेमाल कर सकते हैं। धोनी खुद प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल हैं और उन्हें इसे इस्तेमाल करने की इजाजत है। आइसीसी की आपत्ति के बाद यह विवाद शुरू हुआ है। समर्थकों की अपनी दलील है और उनका मानना है कि कोई खिलाड़ी देश के प्रति सम्मान दिखाता है तो उस पर आइसीसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। महत्वपूर्ण यह भी है कि यह पहला मौका नहीं है कि जब इस तरह से संदेश देने की कोशिश भारतीय टीम ने की हो।

दूसरी टीमें भी इस तरह के संदेश समय-समय पर देती रहती हैं। पिछले दिनों रांची में ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मुकाबले में पूरी भारतीय टीम ने आर्मी कैप पहनकर सीआरपीएफ के शहीदों को श्रद्धांजलि दी थी। धोनी कई बार यह बोल चुके हैं कि अगर क्रिकेटर नहीं होते तो सेना का हिस्सा जरूर होते। ऐसे में उनकी भावनाओं का सम्मान आइसीसी को करना चाहिए।

Published On:
Jun, 09 2019 04:39 PM IST

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।