20 साल बाद अमावस्या और नवरात्र आए एक ही दिन, ये हैं पूजा के श्रेष्ठ मुहूर्त

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20 वर्ष बाद पहली बार नवरात्रि तथा अमावस्या एक ही दिन आ रहे हैं

इस बार नवरात्र बहुत ही खास होने जा रहे हैं। लगभग 20 वर्ष बाद पहली बार नवरात्रि तथा अमावस्या एक ही दिन आ रहे हैं, ऐसे में श्रद्धालुओं के सामने संकट खड़ा हो गया है कि वो अमावस्या को मानें या नवरात्रि के लिए घट स्थापना करें।

ज्योतिष की गणना के अनुसार इस बार चैत्र अमावस्या 28 मार्च की सुबह 8.27 पर खत्म होगी जबकि 8.28 पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शुरु हो जाएगी जिसके साथ ही नवरात्रि आरंभ हो जाएंगे। ऐसे में सभी को यह कन्फ्यूजन है कि क्या करना चाहिए।



विद्वान ज्योतिषियों के अनुसार यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। इसका सबसे सीधा हल यही है कि अमावस्या से संबंधित सभी कार्य 28 मार्च की सुबह 8.27 तक कर लिए जाएं। इसके बाद नवरात्रि पूजन हेतु कलश स्थापना का कार्य आरंभ किया जा सकता है। 28 मार्च को सुबह 8.30 बजे बाद नवरात्र पूजा आरंभ की जा सकती हैं।

जो लोग इतनी जल्दी अमावस्या के कार्य करने में असमर्थ हों वो 27 मार्च के दिन भी शास्त्रानुसार कर्म कर सकते हैं। इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का क्षय हुआ है अर्थात् प्रतिपदा 28 मार्च 2017 मंगलवार को सूर्योदय बाद प्रात: 8.27 पर प्रारंभ होकर मंगलवार अर्द्धरात्र्योत्तर अगले दिन सूर्योदय पूर्व प्रात: 6.24 पर समाप्त हो रही है। मंगलवार व बुधवार दोनों ही दिन प्रतिपदा उदय व्यापिनी नहीं बनी है।

ये हैं घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
श्रेष्ठ चौघड़ियों की दृष्टि से प्रात: 9.29 से दोपहर बाद 2.04 तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत के चौघड़ियों में भी घट स्थापना की जा सकती है। घट स्थापना का श्रेष्ठ समय दोपहर 12.08 से 12.56 तक अभिजित मुहूर्त में सर्वश्रेष्ठ समय है। इनके अतिरिक्त मंगलवार सुबह 8.27 से 9.30 तक 11 से दोपहर 2.00 बजे तक भी घट स्थापना कर सकते हैं।

Web Title "Navratri puja muhurat 2017 "

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