सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान से बातचीत जारी, भारत अपने अधिकार से नहीं हटेगा पीछे

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उरी हमले के बाद सिंधु जल समझौते पर भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से वार्ता शुरू हो गई है। आज से  इस्लामाबाद में 10 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल और पाकिस्तान प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत जारी है।  

नई दिल्ली: उरी हमले के बाद सिंधु जल समझौते पर भारत और पाकिस्तान के बीच टूटी वार्ता आज से शुरू हो गई है। इस्लामाबाद में आज से दो दिवसीय बातचीत शुरू हुई है। स्थायी सिंधु आयोग पीआईसी की बैठक में हिस्सा लेने के लिए 10 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल  यहां पहुंच गया और दोनों देशों के बीच बातचीत शुरुआत हो गई है। प्रतिनिधिमंडल में भारत के सिंधु जल आयुक्त पीके सक्सेना, विदेश मंत्रालय के अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। हालांकि भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि सिंधु समझौते के तहत मिले अधिकार से वह पीछे नहीं हटेगा। पाकिस्तान लगातार सिंधु से जुड़ी नदियों पर भारत की परियोजनाओं का विरोध करता रहा है और विश्व बैंक से मध्यस्थता की गुहार लगाता रहा है। पाक का कहना है कि ये परियोजनाएं सिंधु जल समझौते का उल्लंघन हैं। 

उरी हमले के बाद से बंद थी बातचीत
नदी परियोजनाओं पर विवाद को दूर करने के लिए भारत और पाकिस्तान ने सिंधु जल आयुक्त का गठन किया है। इसमें दोनों देशों के आयुक्तों की छह महीने में बैठक होना तय है।लेकिन पिछले साल 18 सितंबर को उरी में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय बातचीत को स्थगित कर दिया था।इसमें सिंधु जल समझौते पर बातचीत भी शामिल था। यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी साफ कर दिया था कि सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर भारत अपनी परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी लाएगा और अपने हिस्से के अधिकतम पानी का उपयोग करेगा। हालांकि समय बीतने के बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे को लेकर बातचीत हो रही है। सूत्रों ने साफ कर दिया है कि बैठक के दौरान भारत के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


2 साल बाद द्विपक्षीय वार्ता 
स्थायी सिंधु जल आयोग की आखिरी बैठक मई 2015 में हुई थी। इसके बाद पाकिस्तान रतल और किशनगंगा परियोजनाओं पर अपने ऐतराज को वर्ल्ड बैंक लेकर गया था।उरी हमलों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी साफ कर दिया था कि सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर भारत अपनी परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी लाएगा और अपने हिस्से के अधिकतम पानी का उपयोग करेगा। हालांकि सिंधु जल समझौता दोनों देशों के बीच तमाम कशीदगी के बावजूद बरकरार है। 

Web Title "Indus water commission meet in Pakistan: Top developments "

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