JLF2017 : महिला अपराधों के लिए पाश्चात्यकरण दोषी नहीं, बीमारी खुद करनी होगी डायग्नोस - जावेद अख्तर

Dilip chaturvedi

Publish: Jan, 23 2017 12:04:00 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India

गीतकार जावेद अख्तर ने महिला अपराधों के लिए पाश्चात्यकरण को दोषी ठहराने के तर्क को किया खारिज...

जयपुर। गीतकार जावेद अख्तर ने महिला अपराधों के लिए पाश्चात्यकरण को दोषी ठहराने के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि बार-बार ऐसे अपराधों के लिए हम ठीकरा पाश्चात्यकरण पर फोड़ देते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। हमें अपने समाज की बीमारी को खुद डायग्नोस करना होगा। उन्होंने फिल्मों में आइटम सॉन्ग की तुलना मदारी के बंदर से की है। दूसरी ओर यह भी कहा है कि समाज में आने वाला भविष्य महिलाओं का है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में 'आफ्टर द एंग्री यंग मैन, द ट्रेडिशनल वीमन, वॉट?' सेशन में उन्होंने सवालों के जवाब में ये बातें कहीं। 


महिला अपराधों के पीछे हैं दो आधार...
इस मौके पर जावेद ने कहा कि महिला अपराधों के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला समाज का एकाकीपन और दूसरा आर्थिक आधार पर समाज का अलगाव। हम अपनी बीमारी का गलत डायग्नोस करेंगे, तो नहीं चलेगा। बचपन में एक भाई ही अपनी बहन से ठीक से बात नहीं कर पाता, तो वह कैसे दूसरी महिलाओं की भावना को समझेगा। ऐसे ही जो गरीब है, उसके भीतर इस बात का गुस्सा है कि वह क्यों गरीब है? ये ही भावनाएं जहर बनकर बाहर निकलती हैं। 

नायिकाओं ने अपनी छवि को बदला...

खचाखच भरे चारबाग में उन्होंने दशकों के हिसाब से फिल्मों में आए बदलाव को बताया। जावेद ने कहा कि पहले पति में लाख बुराइयों के बावजूद पत्नी चुप रहती थी। लेकिन फिर जीनत अमान और परवीन बॉबी जैसी आत्मविश्वासी नायिकाओं ने इस छवि को बदला । बाद में जया भादुड़ी, शबाना ने नए दरवाजे खोले और अब प्रियंका चोपड़ा व दीपिका पादुकोण ने जगह ले ली। 

अब समाज बदल रहा है सिनेमा 
जावेद ने कहा कि पहले सिनेमा सोसायटी को प्रभावित करता था। अब सोसायटी सिनेमा को बदल रही है। समाज बदल रहा है। पहले पुरुष सिगरेट पीते थे, आज महिलाएं पी रही हैं। अब अधिकतर फिल्में टीनेजर्स के मुताबिक बनाई जा रही हैं। ऐसे में अब गांव की गोरी नहीं चलेगी। आज का नौकर यह नहीं कहता कि मालिक मैंने आपका नमक खाया है। अधिक फिल्में असल जिंदगी के किरदारों पर बन रही हैं। उन्होंने 'सुल्तान', 'दंगल', 'बजरंगी भाईजान' जैसी फिल्मों के नाम भी गिनाए। एक सवाल पर जावेद ने कहा कि फिल्म में गाने बॉलीवुड की विशेषताएं हैं। इसकी हॉलीवुड से तुलना नहीं करनी चाहिए। 

नया हुक्मनामा से शुरू किए कयास 
जावेद ने श्रोताओं की मांग पर अपनी नई रचना 'नया हुक्मनामा' सुनाई, जिसे लेकर जेएलएफ में कयास लगाए जाते रहे कि आखिर ये किस विषय पर है। जावेद की रचना कुछ ऐसी थी-
किसी का हुक्म है कि सारी हवाएं चलने से पहले ये बताएं कि उनकी सिक्त क्या है। उन्हें चलने से पहले यह भी बताना होगा कि चलेंगी तो रफ्तार क्या होगी...। 

Web Title "Social disparity is to blame for rape, not Westernisation: Javed Akhtar "

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