'ऊषा किरणÓ भी नहीं दिखा पा रही न्याय की रोशनी

harinath dwivedi

Publish: Mar, 20 2017 12:08:00 (IST)

Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

जिले में घरेलू हिंसा की शिकार होने वाली महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए महिला बाल विकास विभाग की आेर से शुरू की गई ऊषा किरण योजना भी महिलाओं को न्याय नहीं दिला पा रही है।

होशंगाबाद। जिले में घरेलू हिंसा की शिकार होने वाली महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए महिला बाल विकास विभाग की आेर से शुरू की गई ऊषा किरण योजना भी महिलाओं को न्याय नहीं दिला पा रही है। इसके लिए वन स्टेप हेल्प डेस्क भी शुरू किया गया है, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर महिलाएं  हेल्प डेस्क तक पहुंच ही नहीं रही हैं। इसे शुरू हुए तीन महीने हुए लेकिन वन स्टेप में एक भी समाधान नहीं हो पाया। महिलाएं ससुराल की बजाए अपने मायके में रहने को मजबूर है।

वर्ष 2016 में अप्रैल से अक्टूबर तक के आंकड़ें देखें तो सात माह में 49 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 43 मामले कोर्ट में लंबित हैं। अक्टूबर माह के  बाद से चालू मार्च माह तक के आंकड़े विभाग के रिकॉर्ड में अपडेट ही नहीं है।
इन घटनाओं पर होती है   डीआईआर : घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 (2005 का 43) की धारा 9 (ख) और धारा 37 (2) (ग) के अधीन घरेलू घटना रिपोर्ट यानी डीआईआर में महिलाओं की सुरक्षा एवं उन्हें अत्याचार से निजात दिलाने के घटना के कई प्रकार हैं। जैसे शारीरिक हिंसा में मारपीट, दांत से कांटना आदि शामिल हैं। इनमें से किसी भी तरह के घटनाक्रम की पीडि़त महिला डीआईआर करा सकती हैं।

वर्ष 2016 में         ऊषा किरण योजना   में प्राप्त शिकायतें
प्राप्त शिकायतें - 49
दर्ज डीआईआर- 44
काउंसिलिंग में भेजे प्रकरण- 34
कोर्ट भेजे गए प्रकरण- 24
कोर्ट में लंबित प्रकरण - 43
विधिक सहायता - 6

वर्ष 2016 में           परिवार परामर्श केंद्र   में कुल मामले
पूर्व लंबित 6, वर्ष में दर्ज मामले 204, निराकृत 107 बतौर समझौता, कानून सलाह 67, स्वेच्छा से अलगाव 3
उपलब्ध सहायता : परामर्शदाता, पुलिस सहायता, दांडिक कार्यवाहियां प्रारंभ करने के लिए सहायता, आश्रय गृह, चिकित्सा सुविधाएं, विधिक सहायता

 जिले में घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए विभागीय तौर पर प्रयास किए जाते हैं। महिलाएं परामर्श केंद्र में सुलह के साथ ही बाल विकास परियोजना अधिकारी के माध्यम से कोर्ट में भी प्रकरण लगा सकती हैं।
सतीश भार्गव, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी

Web Title "Usha Kiran' can not even show the light of justice "

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