जहां खेजड़ी की छाल खानी पड़ी थी, वहां अब 9 अरब का जीरा

Mukesh Sharma

Publish: Apr, 28 2016 12:11:00 (IST)

Barmer, Rajasthan, India

रेगिस्तान का बाड़मेर जिला, जहां कभी बाजरे का उत्पादन भी बारिश पर निर्भर था और अकाल में लोगों का

बाड़मेर।रेगिस्तान का बाड़मेर जिला, जहां कभी बाजरे का उत्पादन भी बारिश पर निर्भर था और अकाल में लोगों का पलायन शुरू हो जाता था। बाजरी की रोटी भी नसीब नहीं होने पर छब्बीसे (विक्रम संवत 2026) में लोगों ने खेजड़ी की लकडि़या (छाल) खाकर दिन गुजारे थे, लेकिन अब वही धोरा-धरती नर्मदा का पानी और कई क्षेत्रों में भू-गर्भ से मीठा पानी मिलने से रबी की फसलों से लोगों के आंगन भरने लगी है।


इस वर्ष जिले में वाणिज्यिक फसल जीरा की करीब 9 अरब की उपज हुई। इसको लेकर 1 लाख 32 हजार 13 हैक्टेयर में बुवाई            की गई। इससे 56 हजार 325 मीट्रिक टन जीरा पैदा हुआ है। इसकी कीमत बाजार के वर्तमान दाम के हिसाब से 9 अरब 1 करोड़ 20 लाख रुपए के करीब है।           जिले में हाल ही में रबी की करीब 15 अरब की फसलें किसानों ने     ली है।

बाड़मेर में लगेगी जीरा मण्डी


बाड़मेर में जीरे की पैदावार को लेकर 'पत्रिकाÓ की ओर से चलाए गए अभियान के बाद विधानसभा में कृषि मंत्री ने घोषणा की कि बाड़मेर में शीघ्र ही जीरा मण्डी स्थापित की जाएगी। अब तक बाड़मेर का जीरा गुजरात की ऊंझा मण्डी जा रहा है। अब बाड़मेर में मंडी बनती है तो किसानों को यहां पर सुविधा मिलेगी।

चीन-जापान तक डिमांड

 बाड़मेर का जीरा ऑर्गेनिक है। इसे अब जापान, चीन और अन्य देशों में भेजा जा रहा है। गुड़ानाल सहित सिवाना क्षेत्र से बड़ी मात्रा में जीरा विदेशों में पहुंच रहा है। यहां के किसानों का जीरा तो खेत में ही कंपनियां खरीद लेती है।गजेन्द्रसिंह राजपुरोहित, किसान, गुड़ानाल

जीरे ने किया निहाल

 किसानों के लिए जीरा बहुत ही फायदेमंद साबित हो रहा है। यहां किसानों के पास सैकड़ों बीघा जमीन है। एेसे में 8 से 10 लाख की उपज कई किसानों के हुई है। जीरे ने किसानों को निहाल किया है। जीरा मण्डी खुलती है तो बाड़मेर को फायदा होगा।ईश्वरसिंह राठौड़, किसान, कोटड़ा

जीरा इसलिए ज्यादा

  जीरे की फसल के लिए तापमान 4 डिग्री से कम नहीं होना चाहिए। रेगिस्तान में 5 से 7 डिग्री तक तापमान रहता है। इसके अलावा अधिकतम तापमान भी 20 डिग्री के करीब चाहिए, जो सर्दियों में रहता ही है। एेसे में फसलों में पाला पडऩे की संभावना यहां बहुत कम रहती है। इस कारण लोग वाणिज्यिक फसल जीरे की बुवाई बड़ी मात्रा में कर रहे हैं।
डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक

ईसबगोल भी नहीं पीछे


जीरे के बाद इस साल ईसबगोल की पैदावार भी 5 अरब 25 करोड़ की हुई है। जिले में 1 लाख 7 हजार 373 हैक्टेयर में ईसबगोल की बुवाई की गई थी। इसके अलावा रायड़ा करीब 6 करोड़ एवं गेहूं 45 करोड़ का उपजा है।



ये फसलें भी हुई

जौ, चना, तारामीरा, मैथी और सौंफ की बुवाई भी किसानों ने की थी। वहीं नहरी क्षेत्र में सब्जियों की बुवाई भी की गई। इस बुवाई से किसानों को नए प्रयोग करने की भी दिशा मिली है।

Web Title "Had to eat the bark of Prosopis cineraria, there is now 9 billion cumin "

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