कमाई के साथ इसरो को वैज्ञानिकों की जरूरत बढ़ी

Mukesh Sharma

Publish: Mar, 20 2017 10:37:00 (IST)

Bangalore, Karnataka, India

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को उपग्रहों के प्रक्षेपण से पिछले दो वर्ष में 765 लाख यूरो और 45

बेंगलूरु।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को उपग्रहों के प्रक्षेपण से पिछले दो वर्ष में 765 लाख यूरो और 45 लाख डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। इसरो की यह कमाई विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण से हुई है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा राज्य सभा में दी गई जानकारी के अनुसार इसरो पीएसएलवी रॉकेट की क्षमता का अधिकतम उपयोग कर रहा है। राष्ट्रीय जरूरतों के बाद पीएसएलवी रॉकेट की अतिरिक्त क्षमता वाणिज्यिक सेवाओं के लिए उपलब्ध है जिसका भरपूर इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है। अब तक पीएएसएलवी ने 180 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है और उसका रिकॉर्ड शानदार रहा है। इसके बावजूद उपग्रह प्रक्षेपण के वैश्विक बाजार में इसरो की हिस्सेदारी काफी कम (लगभग 4 फीसदी) है। लेकिन, पिछले 15 फरवरी को एक ही अभियान में 104 उपग्रहों के प्रक्षेपण के बाद दुनिया का नजरिया इसरो के प्रति बदला है।

दरअसल, इसरो विश्व की सबसे किफायती दर पर उपग्रह लांच करने वाली एकमात्र एजेंसी है और विश्व की उन एजेंसियों की नजर इसरो पर है जो अपने उपग्रह लांच कराना चाहती हैं।  इस बीच राष्ट्रीय जरूरतों के साथ-साथ विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण की बढ़ती मांग के मद्देनजर इसरो नए इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की नियुक्ति पर विचार कर रहा है।


केंद्रीय मंत्री जितेंद्रसिंह द्वारा संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक इस संदर्भ में एक प्रस्ताव तैयार किया गया है जो अंतरिक्ष आयोग के विचाराधीन है। इस प्रस्ताव में इसरो में मानव शक्ति बढ़ाने की बात कही गई है। मुख्य रूप से इसरो वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की संख्या बढ़ाना चाहता है। फिलहाल इसरो में कुल 7062 वैज्ञानिक एवं इंजीनियर कार्यरत हैं। लेकिन, देश में अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की मांग बढऩे से इसरो को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए उपग्रह प्रक्षेपण बढ़ाना होगा।इसरो हर वर्ष पीएसएलवी के 10-12 और जीएसएलवी के दो मिशन को अंजाम देना चाहता है। इसके साथ ही उभरते हुए क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों के लिए मानव शक्ति की आवश्यकता बढ़ी है।

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