आईटी नौकरियों पर लटकी कटौती की तलवार

Mukesh Sharma

Publish: Apr, 20 2017 01:03:00 (IST)

Bangalore, Karnataka, India

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बाई अमरीकन, हायर अमरीकनÓ अभियान के तहत एच-1बी वीजा नियमों को सख्त

बेंगलूरु।अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बाई अमरीकन, हायर अमरीकनÓ अभियान के तहत एच-1बी वीजा नियमों को सख्त करने से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों को न केवल बढ़ते खर्च का सामना करना पड़ेगा, बल्कि स्वदेश में कई कर्मचारियों को नौकरी से निकालना भी पड़ सकता है। रुपए की मजबूती से आईटी कंपनियों की परेशानी और बढ़ेगी। यह अनुमान उद्योग एवं वाणिज्य मंडल एसोचैम ने बुधवार को जाहिर की।

एसोचैम की ओर से जारी एक अध्ययन पत्र के मुताबिक कंप्यूटर जगत में 86 फीसदी एच-1 बी वीजा भारतीयों को ही जारी होता रहा है। अब यह आंकड़ा 6 0 फीसदी या उससे भी कम हो सकता है। इससे अमरीका में भारतीयों द्वारा कमाए जाने वाले और स्वदेश भेजे जाने वाले धन में कमी होगी, जिससे भुगतान संतुलन को नुकसान पहुंचेगा। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 में नौकरी से अर्जित आय भारत को भेजने के मामले में अमरीका का दूसरा स्थान था। पहले नंबर पर सउदी अरब था, जहां से भारतीय सर्वाधिक धन कमाकर स्वदेश भेजते हैं। इस दौरान, भारत को करीब 10.96  अरब डॉलर यानी कुल आने वाली आय का करीब 16 फीसदी अमरीका से मिला था। उद्योग चैंबर का अनुमान है कि इससे संतुलन में 8-10 फीसदी की कमी आएगी।  रुपए के ऊपर चढऩे के कारण जैसे-जैसे कीमतें बढ़ेंगी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को कर्मचारियों को हटाने पर मजबूर होना पड़ेगा। एसोचैम के महासचिव डी.एस.रावत ने कहा, 'ऐसी स्थिति में छंटनी की स्पष्ट संभावना है।Ó

उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के सर्वोच्च संगठनों तथा सरकार को असामान्य हालात से निपटने के लिए एक संयुक्त रणनीति पर काम करने की जरूरत है। पिछले तीन महीनों में भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले पांच फीसदी मजबूत हुई है, जिसके कारण निर्यात संबंधित अन्य क्षेत्रों के अलावा सॉफ्टवेयर निर्यात से होने वाले राजस्व में भी कमी आई है। ब्रिटेन भी 'टियर टू वीजा आव्रजकोंÓ के लिए न्यूनतम वेतन बढ़ाकर पहले ही 35,000 यूरो कर चुका है। अब अमरीका के सख्त रुख से भारतीय आउटसोर्सिंग उद्योगों को निश्चित तौर पर तगड़ा झटका लगेगा। भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों के पास वैकल्पिक समाधान में अपने संयंत्र को अमरीका के निकट स्थापित करना, स्थानीय अमरीकी लोगों को काम पर रखना तथा वर्चुअल माध्यम से काम करने की छूट देना शामिल है, जो क्लाउड सर्विसेज को व्यापक तौर पर स्वीकार करने से आसान हो गया है।

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