चिकित्सा का व्यवसायीकरण रोकना सरकार का दायित्व

Mukesh Sharma

Publish: Mar, 21 2017 05:42:00 (IST)

Bangalore, Karnataka, India

निजी क्षेत्र के अस्पतालों में स्वास्थ्य चिकित्सा क्षेत्र का बढ़ता व्यवसायीकरण चिंताजनक है। इसे रोकने के लिए

बेंगलूरु।निजी क्षेत्र के अस्पतालों में स्वास्थ्य चिकित्सा क्षेत्र का बढ़ता व्यवसायीकरण चिंताजनक है। इसे रोकने के लिए समाज के सभी वर्गों को सरकार से सहयोग करना होगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री केआर       रमेश कुमार ने यह बात कही।

विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के श्रीनिवास माने के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि चिकित्सा से मना करने वाले किसी भी अस्पताल को बख्शा नहीं जाएगा। स्वास्थ्य चिकित्सा क्षेत्र में एक संगठित माफिया चल रहा है। यह माफिया खुद को सरकार से अधिक ताकतवर समझता है। लेकिन सरकार उसके आगे नहीं झुकेगी और चिकित्सा के नाम पर लूट की छूट नहीं दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने यशस्विनी, वाजपेयीश्री समेत विभिन्न चिकित्सा योजनाओं के तहत चिकित्सा के लिए निजी क्षेत्र के अस्पतालों को 600 करोड़ रुपए से अधिक राशि का भुगतान किया है। अब केवल 30 करोड़ रुपए का भुगतान बाकी है। इस राशि का भुगतान नहीं करने तक निजी क्षेत्र के कुछ अस्पतालों ने सरकारी योजनाओं के अंतर्गत मरीजों को चिकित्सा नहीं देने की धमकी दी है। लेकिन सरकार निजी अस्पतालों की मनमानी के सामने नहीं झुकेगी। जो अस्पताल इलाज से मना करेंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  


मंत्री के बयान पर आपत्ति करते हुए नेता प्रतिपक्ष के.एस.ईश्वरप्पा ने कहा कि कई निजी अस्पताल सरकारी अस्पतालों से भी बेहतर सेवा दे रहे हैं। निजी क्षेत्र के सभी अस्पतालों को खारिज करना ठीक नहीं है। इस पर मंत्री ने कहा कि निस्संदेह निजी क्षेत्र के कुछ अस्पताल सामाजिक सरोकार को ध्यान में रखते हुए बेहतरीन सेवाएं दे रहें हैं। ऐसे अस्पतालों को सरकार बधाई देती है लेकिन इस वास्तविकता से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि कारर्पोरेट शैली के कुछ अस्पतालों में अनावश्यक परीक्षण कराने और  अधिक से अधिक फीस वसूलने की होड़ लगी है। इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।  भाजपा के सदस्य रामचंद्रगौडा ने मंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि निजी क्षेत्रों की इस मनमानी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए तथा ऐसे कड़े फैसलों का विपक्ष को समर्थन करना चाहिए।

नियुक्ति आदेश नहीं मान रहे डॉक्टर

कांग्रेस के सदस्य बोसराज के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि आबादी के अनुपात में कई जिलों में प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की संख्या कम है। रायचूर जिले में 55 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है अभी इनमे से 49 चिकित्सा केंद्रों में चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है। बाकी के 6 चिकित्सा केंद्रों में चिकित्सक की नियुक्ति की प्रक्रिया इसी सप्ताह पूरी होगी। जिले के 4 तहसील चिकित्सा केंद्रों में 45 विशेष चिकित्सकों में से 22 पद रिक्त है। इन पदों के लिए कर्नाटक लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयन होने के बावजूद कई विशेष चिकित्सक (सर्जन) रायचूर, बीदर कोप्पल जैसे केंद्रों में सेवा से इनकार कर रहे हैं। चिकित्सकों को मासिक 1 लाख 25 हजार का वेतन निशुल्क आवास जैसी सुविधाओं का आश्वासन देने के बावजूद चिकित्सक अपनी मर्जी के जिलों में ही काम करना चाहते हैं।

टीकाकरण अभियान सफल

कांग्रेस के सदस्य आर. प्रसन्नकुमार के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि बच्चों में जानलेवा खसरा तथा रुबेला की रोकथाम के लिए राज्यव्यापी टीकाकरण अभियान को लेकर कई भ्रांतिया फैलाई जा रही है।

इसके बावजूद इस अभियान को बेहद सफलता मिली है। अगर राज्य के कुछ जिलों में बच्चों का टीकाकरण का कार्य शेष है, तो इसकी समयसीमा बढ़ाई जाएगी। वर्ष 2015-16  के पहले चरण में अभियान के तहत 10, 70,771 तथा वर्ष 2016-17 के दूसरे चरण में अभी तक 9 लाख 62 हजार 800 बच्चों का टीकाकरण किया गया है। इन बीमारियों से राज्य में वर्ष 2014 में 13 तथा वर्ष 2016 में 3 बालकों की मौत हुई है।

Web Title "Government's obligation to stop the commercialization of medicine "

Rajasthan Patrika Live TV