अर्धन्यायिक प्राधिकरणों के लिए स्पष्ट मानदंड समय की मांग

Shankar Sharma

Publish: Mar, 19 2017 09:30:00 (IST)

Bangalore, Karnataka, India

मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कहा कि अर्धन्यायिक प्राधिकरण (क्वासी ज्युडिशियल अथारिटीज) के लिए स्पष्ट मानदंड का निर्धारण समय की मांग है। इनके लिए विशेष कार्ययोजना पर हमें ध्यान केंदित करना होगा।

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कहा कि अर्धन्यायिक प्राधिकरण (क्वासी ज्युडिशियल अथारिटीज) के लिए स्पष्ट मानदंड का निर्धारण समय की मांग है। इनके लिए विशेष कार्ययोजना पर हमें ध्यान केंदित करना होगा। 

कर्नाटक अपीलेट ट्राइब्युनल की ओर से अर्ध न्यायिक प्राधिकरणों की कार्यवाही में सुधारों को लेकर दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में शनिवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की धारा 50 के तहत न्यायपालिका, कार्यपालिका तथा विधायिका के अधिकार तथा कार्यक्षेत्रों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। जिसके अनुसार ही इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों को अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहण करना पड़ता है। न्यायपालिकाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय मानवअधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, सूचना आयोग, विभिन्न पंचाट, जांच आयोग जैसे कई अर्धन्यायिक प्राधिकरण उन्हें प्रदत्त अधिकारों के मुताबिक सौंपा गया दायित्व निभा रहे हैं। यह भी एक न्यायदान का ही पवित्र कार्य है।

उन्होंने कहा कि अर्धन्यायिक प्राधिकरणों में न्याय दिलाने की प्रक्रिया में तेजी के लिए कर्नाटक अपीलेट ट्राइब्युनल का 'केस वॉच सिस्टम' अब पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुका है।

राज्य सरकार ने इस प्रणाली के लिए 9.74 करोड़ रुपए का अनुदान दिया है। इस अनूठे सॉफ्टवेयर के कारण याचिकाकर्ता तथा अधिवक्ताओं को याचिका दायर करने से लेकर अंतिम फैसला आने तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी  संभव है। 

राजस्व मंत्री कागोडु तिम्मप्पा ने कहा कि संविधान के मुताबिक न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका को मर्यादा में रहकर कार्य करने से ही लोकतंत्र की रक्षा संभव है। लेकिन यह चिंता की बात है कि कई बार न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका अपने कार्यक्षेत्र का उल्लंघन करती हैं। लोगों को तेज गति से न्यायप्रदान करने में न्यायपालिका तथा अर्धन्यायिक प्राधिकरणों में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। इस बात पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि न्याय पाने के लिए आम लोगों को अधिक पैसा खर्च करना पड़ रहा है ।

समारोह में कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस.के.मुखर्जी ने कहा कि न्यायालय में कर्मचारियों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर राज्य सरकार को 6 माह पहले सूचित करने के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अगर यह मांग पूरी करने में राज्य सरकार को कोई समस्या है तो तुरंत न्यायपालिका को अवगत किया जाना चाहिए। ऐसी मांगों को लंबित रखना तार्किक नहीं है। समारोह में न्यायाधीश मोहन शांतन गौडर तथा सरकार के मुख्य सचिव सुभाष कुंठिया ने विचार व्यक्त किए।

Web Title "Demand for time-bound norms for arbitrary authorities "