यहां के एक पेंशनर के खाते में आए 7 लाख रुपए, फूले हाथ पैर

By Mukesh Sharaiya

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15 Feb 2020, 06:39 AM IST

Neemuch

नीमच. एक पेंशनर के खाते में 7 लाख रुपए की राशि गलती से डल गई। इतनी बड़ी राशि खाते में आने के बाद पेंशनर सकते में आ गए। बैंक के कई चक्कर लगाए के बाद भी संतुष्टिपूर्ण उत्तर नहीं मिलने। अंत में बताया गया कि राशि गलती से डल गई है। अगले महीने गलती में सुधार कर लिया जाएगा।
मात्र 25 हजार पेंशन, राशि आई 7 लाख
कलेक्टोरेट से 31 मई 2015 को जगदीश शर्मा सेवानिवृत्त हो गए थे। उनकी पेंशन सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा नीमच में आती है। खाता क्रमांक 3461465074 से पेंशन आती है। प्रतिमाह 25 हजार मासिक पेंशन मिलती है। खाते में 30 जनवरी 2020 को 6 लाख 91 हजार 432 की राशि जमा हुई। इतनी बड़ी राशि जमा होने की जानकारी मिलने पर पास बुक में इन्ट्री कराने का प्रयास किया तो 10 फरवरी 2020 तक इंट्री ही नहीं हुई। बताया गया कि कर्मचारी अवकाश पर है। 25 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलने पर करीब 7 लाख रुपए एक मुश्त खाते में जमा होने से जगदीश शर्मा परेशान थे। नीमच बैंक शाखा में महिला कर्मचारी से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि आपकी एफ डी की राशि है। जो आपके खाते में जमा की गई है। पेंशनर ने बताया कि कोई एफ डी मेरे नाम की जनवरी 2020 में नहीं तोड़ी गई। इतनी बड़ी एफ डी पेंशनर के नाम नहीं है।
दो आईडी बनने से गलती से डली बड़ी राशि
11 फरवरी को बैंक जाकर पेंशन से संबंधित शाखा अधिकारी से संपर्क किया। उन्हें बताया कि मैं दो रोज से बराबर बार-बार आ रहा हूं। मेरे खाते में अधिक राशि जमा होने के बारे में स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने रिकार्ड की जांच कर बताया कि आपकी दो आई डी बनी हैं। इस वजह से यह पैसा ऊपर से आपके खाते में जमा हुआ है। यह हमारे लिए भी ठीक नहीं और आपके लिए भी ठीक नहीं है। जगदीश शर्मा ने बताया कि मेरे लिए ठीक नहीं है इसलिए तो बैंक के तीन दिन से चक्कर काट रहा हूं। शर्मा ने राशि वापस लेने के लिए कहा। उन्हें बताया गया कि अगली पेंशन आने पर त्रुटि में सुधार कर लिया जाएगा।
7 लाख खाते में आने से हुआ परेशान
मेरे पेंशन खाते में करीब 7 लाख रुपए की राशि आ गई थी। मैंने इस संबध में बैंक अधिकारियों से कई बार सम्पर्क किया, लेकिन कोई संतुष्टिपूर्ण उत्तर नहीं मिला। तीन दिन चक्कर काटने के बाद बताया गया कि दो आईडी बनने से गलती से राशि खाते में आ गई थी। अगली पेंशन आने पर सुधार करने की बात कही है।
- जगदीश शर्मा, पेंशनर

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