राजस्थान में पटवारियों के अभाव में भटकने को मजबूर है ग्रामीण

By: Dharmendra gaur

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Published: 12 Aug 2019, 08:55 PM IST

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. प्रदेश भर में पटवारियों के रिक्त पदों के कारण राजस्व Patwari news से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए लोग भटकने को मजूबर है। आम लोगों को जमाबंदी की प्रतिलिपि,जाति, आय, मूल निवास, पैमाइश, प्रधानमंत्री आवास योजना, खाद्यान्न सुरक्षा योजना से लेकर सेना भर्ती, चुनाव, परिसीमन, अतिक्रमण हटाने, कॉ ऑपरेटिव के लिए प्रमाणित नकलें देने समेत दर्जनों काम पटवारियों से करवाने होते हैं। प्रदेश के 3745 पटवार मंडलों में पद रिक्त होने के कारण आम लोगों, विशेष रूप से किसानों को परेशानी से दो चार होना पड़ रहा है।


प्रभावित हो रहे राजस्व से जुड़े काम
प्रशासनिक अमले के ग्राम पंचायत स्तर Gram Panchayat News पर सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले पटवारी नहीं होने से सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन व जरुरतमंदों तक लाभ पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। सरकार की 01 जून 2019 की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश भर में पटवारियों के 12 हजार 252 पदों में से 3745 पद रिक्त है। 25 फीसदी पटवार मंडलों में पद रिक्त होने के कारण एक पटवारी को दो-दो पटवार मंडलों का काम करना पड़ता है। एक-एक पटवारी के जिम्मे दो से तीन अतिरिक्त पटवार मंडलों का कार्य दिए जाने से राजस्व से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पटवार संघ द्वारा समय-समय पर रिक्त पदों पर भर्ती की मांग के बावजूद पटवार 3745 मंडलों में पद रिक्त है।


सभी जिलों में इतने पद है रिक्त Patwari Post Vacant in Nagaur
प्रदेश में भीलवाड़ा में सर्वाधिक 255 व झुंझुनू में सबसे कम 30 पद रिक्त है। इसके अलावा अलवर में 76, बांसवाड़ा में 117, बारां में 104,बाड़मेर में 172, भरतपुर में 179, बीकानेर में 105, बूंदी में 106, चित्तौडगढ़ में 142, चूरू में 69, दौसा में 34, धौलपुर में 75, डूंगरपुर में 92, हनुमानगढ़ में 40,जयपुर में 73,जैसलमेर में 61,जालोर में 115, झालावाड़ में 169,जोधपुर में 115, करौली में 101, कोटा में 72, पाली में 207,प्रतापगढ में 78, राजसमंद में 148, सवाई माधोपुर में 101, श्रीगंगानगर में 126, सीकर में 103, सिरोही में 101, टौंक में 82 व उदयपुर में 173 पद रिक्त है।


पटवारी नहीं मिलने पर निराश लौटते किसान
अकेले नागौर जिले में 144 पटवार मंडलों का अतिरिक्त कार्य पटवारी कर रहे हैं। राजस्व मामले, सरकारी योजनाएं तथा विकास से जुड़े आदेश लागू करने की जिम्मेदारी पटवारी पर भी होती है। राजस्व कामकाज के सिलसिले में पटवार मंडल पहुंचने पर पटवार भवन के ताला देखकर काश्तकार निराश होकर लौट रहे हैं। रजिस्ट्री, काश्तकारों को भूमि प्रमाण पत्र,किसान क्रेडिट कार्ड, ओबीसी व ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, सीमा ज्ञान, रास्तों के विवादों का निस्तारण, अवैध खनन रोकने की कार्रवाई, मौका रिपोर्ट समेत राजस्व से जुड़े अन्य कार्य नहीं हो पा रहे हैं।

बढ़ रहा है काम का बोझ
पटवार मंडलों में पदों की रिक्तता के चलते काम का बोझ इतना अधिक है कि पटवारी तनाव से गुजर रहे हैं। सुबह से लेकर देर रात तक काम करने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाता।
ओमप्रकाश बेनीवाल, जिलाध्यक्ष, राजस्थान पटवार संघ, जिला इकाई नागौर

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