साउथ एशिया सैटेलाइट लॉन्च, इंडिया की स्पैस डिप्लोमेसी में बड़ी उड़ान 

  • इसरो निर्मित सार्क सैटेलाइट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से प्रक्षेपण किया गया। सैटेलाइट शांति का संदेश लेकर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ। लॉन्च के बाद इसरो के वैज्ञानिकों को एक दूसरे को बधाई दी। वहीं पीएम मोदी ने सफल प्रक्षेपण के लिए शुभकामानाएं दी। 
नई दिल्ली.  मॉम और 104 उपग्रहों को एक साथ भेजने के बाद इसरो शुक्रवार को एक और बड़ी कामयाबी हासिल किया । इसरो निर्मित सार्क सैटेलाइट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से प्रक्षेपण किया गया। सैटेलाइट शांति का संदेश लेकर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ। इसरो ने 2230 किलो के साउथ एशिया सैटेलाइट GSAT- 9 की कामयाब लॉन्चिंग कर दी। इसे जीएसएलवी-एफ09 रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया। 


सैटेलाइट की लॉन्चिंग से दक्षिण एशिया की प्रगति बढ़ेगी-पीएम मोदी
लॉन्चिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दक्षिण एशियाई सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण पर देश को गर्व है। पीएम मोदी ने साउथ एशियन सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग पर कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर है।


 और जीसैट-9 की लॉन्चिंग से दक्षिण एशिया की और प्रगति बढ़ेगी । 

सार्क राष्ट्राध्यक्षों ने दी बधाई
पीएम मोदी के अलावा सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्ष वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के जरिए सफल लॉन्चिंग पर बधाई दी। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घानी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भूटान के राष्ट्राध्यक्ष समेत 6 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने बधाई दी। अशरफ घानी ने कहा कि इस प्रक्षेपण से क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। 




वैज्ञानिकों ने दी बधाई
लांच के बाद इसरो के वैज्ञानिकों को एक दूसरे को बधाई दी। यह उपग्रह भारत द्वारा सार्क देशों के लिए उपहार के तौर पर दिया गया है। जिसे भारत की स्पैस डिप्लोमेसी में बड़ी उड़ान मानी जा रही है। इसके जरिए पाकिस्तान को छोड़कर बाकी साउथ एशियाई देशों को कम्युनिकेशन की सुविधा मिलेगी। 

उपग्रह का जीवनकाल 12 साल
इस मिशन में अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट पर 450 करोड़ रुपए का खर्च आया है। इस उपग्रह का जीवनकाल 12 वर्षों का होगा। 

तीन साल में बना 2230 किलो वजनी उपग्रह 
बता दें कि कुल 2230 किग्रा के इस उपग्रह को तीन साल में बनाया गया था। यह उपग्रह पूरी तरह संचार उपग्रह है। इसरो ने इसे जीसैट-9 नाम से विकसित किया है।  

भूकंप, आपदा, सुनामी में सैटेलाइट करेगा मदद
सरकार की माने तो यह उपग्रह टेलीकम्यूनिकेशन और प्रसारण संबंधी सेवाओं जैसे- टीवी, डीटीएच, वीसैट, टेलीएजुकेशन, टेलीमेडिसिन और आपदा प्रबंधन सहयोग को संभव बनाएगा। साथ ही इस उपग्रह में भागीदार देशों के बीच हॉट लाइन उपलब्ध करवाने की भी क्षमता है। बता दें कि दक्षिण एशियाई देशों को यह क्षेत्र भूकंप, चक्रवातों, बाढ़, सुनामी आदि के लिहाज से संवेदनशील है, इसलिए यह आपदा के समय पर उपयोगी संवाद लिंक स्थापित करने में भी मदद कर सकता है।

पाक को मंजूर नहीं भारतीय उपहार  
आठ सदस्य देशों वाले सार्क समुह में पाकिस्तान भी शामिल है। मगर पाक ने भारत के इस उपहार को लेने से मना कर दिया है। इस परियोजना में सार्क के बाकी सातों देश भारत, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और मालदीव शामिल हुए। 

समतापमंडलीय कूटनीति में मोदी का बड़ा दांव 
भारत दक्षिण एशिया उपग्रह के जरिए अपने वैदेशिक कूटनीति में बड़ा दांव लगाया है। इस परियोजना से भारत अंतरिक्ष में अपने लिए एक अलग स्थान बना लेगा। इस उपग्रह से भारत के पड़ोसी देशों को अंतरिक्ष आधारित प्रौद्योगिकि के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

पड़ोसियों के साथ मधुर रिश्ता बनाने पर पीएम का जोर 
अपने शपथ ग्रहण समारोह में ही सार्क के राष्ट्रप्रमुखों को बुलवाने वाले मोदी अब दक्षिण एशियाई देशों के बीच अंतरिक्ष में भी रिश्ता मधुर बनाने की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। इस काम के लिए मोदी 450 करोड़ रुपए की लागत वाले एक संचार उपग्रह को इन देशों को उपहार स्वरुप देने जा रहे हैं। पीएम मोदी ने 31वें मन की बात कार्यक्रम में इस अहम परियोजना के बारे में बताया
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